शुकदेव जन्म और राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता

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लखनऊ । मोतीझील, ऐशबाग स्थिति माधव कला मंडप में ममता चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक एवं बीजेपी अवध क्षेत्र उपाध्यक्ष राजीव मिश्र कथा समिति के संयोजक एवं कोषाध्यक्ष गौरव पांडे द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ  के तीसरे दिन कथा प्रारंभ 51 माँ शक्ति के रूप में उपस्थित महिलाओ से दीप प्रज्वलन करने के उपरान्त आरंभ हुआ। श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ  के तीसरे दिन सुविख्यात कथा प्रवक्ता पूज्य संत पंडित राम शरण शास्त्री जी महाराज ने शुकदेव जी के जन्म की कथा सुनाई।एक बार भगवान शिव पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। पार्वती जी को कथा सुनते-सुनते नींद आ गई और वहां बैठे शुक ने हुंकारी भरने लगे। भगवान शिव को यह बात पता चलने पर वे शुक को मारने के लिए दौड़े और उसके पीछे अपना त्रिशूल छोड़ा। शुक जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा और व्यास जी के आश्रम में पहुंचकर सूक्ष्म रूप बनाकर उनकी पत्नी के मुंह में घुस गया। read more:https://pahaltoday.com/mla-sakendra-verma-met-cm-yogi/
शुक फिर व्यास जी के अयोनिज पुत्र के रूप में प्रकट हुए।  शुकदेव बारह साल तक मां के गर्भ से बाहर नहीं निकले थे। भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ही वह गर्भ से बाहर आए थे। जन्म लेने के बाद शुकदेव जी अपने माता-पिता और श्रीकृष्ण को प्रणाम करके वन में तपस्या के लिए चले गए थे। शुकदेव जी ने ही अपने पिता व्यास जी के श्रीमद्भागवत पुराण को पढ़कर उसे राजा परीक्षित को सुनाया था। कथा सुनने के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और उनका नाम अजर-अमर हो गया। कथा सुनने के बाद ब्रह्माजी ने तराजू में जप, तप, यज्ञ, दान को रखा और दूसरे पलड़े में श्रीमद्भागवत कथा को रखा. जिस ओर श्रीमद्भागवत कथा रखी गई थी, उधर का पलड़ा नहीं झुका। ब्रह्माजी ने श्रीमद्भागवत कथा को तत्काल मोक्ष प्रदान करने वाला ग्रंथ करार दिया। राजा परीक्षित, पांडवों के वंशधर अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू की पत्नी उतरा के गर्भ से पैदा हुए थे। कौरवों के साथी अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र चलाकर अभिमन्यू की गर्भवती पत्नी पर हमला किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में ही परीक्षित की रक्षा की थी। महाराजश्री ने महाभारत की दिव्य कथा सुनाकर उपस्थित कई सैकड़ा श्रोताओं को रोमांचित किया। पावन कथा के मध्य भजन मंडल द्वारा सुमधुरूर भजनों पर भावविभोर होकर तालियां बजाते हुए दिखे श्रद्धालू l राजीव मिश्र, गौरव पांडे एवं कथा समिति के सभी सदस्यों द्वारा आरती की गयी। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों वासियों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में सपरिवार मोक्षदायिनी कथा का श्रवण करने का आवाहन किया।

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