भदोही। ऐ अल्लाह रमजान के सदके में दुनिया और आख़ेरत संवार दे। तू रहीम है मेरे मौला रमजान के सदके में हम सबके हालात सुधार दे। बीती रात शबे कद्र थी उस रात कुछ ऐसी ही सदाएं रोज़ादार और इबादतगुजार घरों मस्जिदों में सारी रात करते रहे। ताक रात में पूरी रात इबादत होती रही, रोज़ेदार पूरी रात जागकर इबादत में मशगूल रहे। दरअसल माहे रमजान के आखिरी दस दिनों की पांच रातों में से कोई एक शबे कद्र होती है। इस शब में लोग जागकर रब की इबादत करते हैं। इस्लाम में इस रात को हजार रातों से अफजल बताया गया है। इसलिए रोजेदार ही नहीं बल्कि हर कोई इस रात में इबादत कर अल्लाह से खुसूसी दुआ मांगता है। नफिल नमाजों की खूब कसरत से पढ़ी गई। उक्त बातें हमारे शहर के निर्यातक एवं डॉक्टर्स तथा समाजसेवी हाजी मुमताज़ अहमद राइन, निर्यातक मोहसिन अंसारी, मोहम्मद ज़ाहिर हुसैन, राजू डायर, डॉ, परवेज रहमत, अतीक खां ने शबे कद्र पर रौशनी डालते हुए कहा कि दरअसल रमज़ान महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27, 29 की शब। इन पांच रातों में से कोई एक शबेकद्र होती है। यह रात हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी जाती है। इस रात में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। इसमें महिलाएं और बच्चे भी घरों में इबादत करते दिखाई देते हैं। लोगो ने कहा कि कुरान में बताया गया है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। कहा कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। कहा कि शबे कद्र की रात बड़ी बरकतों वाली होती है। यह रात बड़ी ही चमकदार होती है व सुबह सूरज बिना किरणों के ही निकलता है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में कुबूल होती है। यूं तो रमज़ान महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहले अशरा रहमत, दूसरे को मगफिरत व तीसरे अशरे को जहन्नुम से आजादी का अशरा कहा जाता है। हर अशरा दस दिन का होता है। 22 रोज़ा पूरा होने के साथ ही 23 वें रोज़े की शब, सहरी से पहले तक तमाम इबादत गुज़ार जागकर रब को राज़ी करने के लिए दुआएं की और खूब इबादत की गई। या अल्लाह रब्बुल इज्जत हम सबको ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की तौफीक दे। आमीन