नाटक के जरिए बच्चियों ने जगाई महिला सुरक्षा की अलख, पुलिस की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

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जखनिया (गाजीपुर)। बेटियां सुरक्षित रहें, शिक्षित बनें और अपने सपनों को साकार करें, इसके लिए समाज में जागरूकता की अलख जगाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से एस.ए.एस. हायर सेकेंडरी स्कूल, परसपुर-बुढ़ानपुर की छात्राओं ने महिला सशक्तीकरण के तहत नाटकीय कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया। छात्र-छात्राओं ने अपने अभिनय के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान, समान अधिकार और आत्मरक्षा का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि आखिर बेटियों को ऐसा सुरक्षित वातावरण कब मिलेगा, जहां वे बिना किसी भय के अपने सपनों की उड़ान भर सकें।कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। नाटक के जरिए बताया गया कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस रखना चाहिए। छात्राओं ने अपने अभिनय से यह संदेश दिया कि बेटियां कमजोर नहीं हैं। जरूरत उन्हें अवसर, शिक्षा, सुरक्षा और समाज के सहयोग की है।कार्यक्रम के दौरान यह भी समझाया गया कि महिलाओं के प्रति भेदभाव और असम्मान केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है। बेटियों को सम्मान देना, उनकी बात सुनना और विपरीत परिस्थितियों में उनका साथ देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने का संदेश दिया।विद्यालय के प्रबंधक अनूप सिंह ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। महिलाओं का सम्मान और उनकी सुरक्षा केवल नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार में भी उतारना जरूरी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक रहने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।विद्यालय के शिक्षकों ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने महिला सुरक्षा, शिक्षा, आत्मसम्मान और समान अधिकारों के महत्व को समझाते हुए कहा कि किसी महिला के साथ अन्याय होने पर समाज को मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। बेटियों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे निर्भय होकर अपनी बात रख सकें और अपने भविष्य का निर्णय स्वयं कर सकें।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के बीच पुलिस की गैरमौजूदगी पर सवाल
महिला सशक्तीकरण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के बीच कार्यक्रम में पुलिस की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। विद्यालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस जागरूकता कार्यक्रम के संबंध में पत्रक के माध्यम से भुड़कुड़ा कोतवाली को भी अवगत कराया गया था। इसके बावजूद कार्यक्रम में पुलिस की ओर से कोई सहायता नहीं मिल सकी।ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों में पुलिस की सहभागिता छात्राओं के मन में सुरक्षा का भरोसा मजबूत कर सकती है। खासकर जब बच्चियां स्वयं नाटक के माध्यम से महिलाओं को आत्मरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रही हों, तब सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभागों की मौजूदगी उनके उत्साह को और बढ़ा सकती है।ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सरकार और प्रशासन महिलाओं की सुरक्षा तथा बेटियों के सशक्तीकरण पर जोर देते हैं, तो जमीनी स्तर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में संबंधित विभागों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए? हालांकि, पुलिस की अनुपस्थिति के कारणों को लेकर भुड़कुड़ा कोतवाली का पक्ष सामने आना बाकी है।महिला सशक्तीकरण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब बेटियों को जागरूक करने के साथ उनकी सुरक्षा के प्रति समाज और संबंधित विभाग भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बच्चियों की यह पहल एक संदेश देती है कि बदलाव की शुरुआत छोटी-छोटी कोशिशों से होती है, लेकिन उस बदलाव को मजबूत बनाने के लिए पूरे समाज का साथ जरूरी है।

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