एसआईआर के नाम पर दिल्ली में काटे गए वोटर के नाम तर्कहीन- कांग्रेस नेता चतर सिंह

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नई दिल्ली,। कांग्रेस पार्टी के नेता ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली में एसआईआर के नाम पर राज्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने जिस तरह 47 लाख 56 हजार 722 सौ वोटरों के नाम काटे हैं वह पूरी तरह से तर्कहीन है। दिल्ली में प्रति वर्ष वोटरों की संख्या बढ़ रही है। देश के दूसरे राज्यों से लोग आते हैं और यहीं के हो जाते हैं। ऐसे में वोटरों की संख्या बढ़ती है न कि घटती है। राज्य चुनाव अधिकारी ने जिस तरह विधान सभा के क्षेत्र के हिसाब से वोटरों के नाम काटे हैं उससे यह साफ है कि यह एक राजनीतिक दल की मिलीभगत से यह सब हो रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार ओबीसी आयोग के पूर्व अध्यक्ष चतर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि 2025 विधान सभा चुनाव के समय कुल एक करोड़ 56 लाख 26 हजार 756 वोटर थे। इसमें 94 लाख 34 हजार 638 वोट पड़े। इसमें यदि आयोग के वर्तमान आंकड़े जिसमें एक करोड़, 45 लाख 10 हजार 299 मतदाता घटा दें तो फिर 11 लाख 20 हजार 495 मतदाता कहां गए? चुनाव अधिकारी कार्यालय को इसका जबाब देना चाहिए।जबकि इस लिहाज से 2026 में एक अनुमानित जनसंख्या दो करोड़, 33 लाख, 90 हजार 387 सौ मतदाताओं की आंकी गई है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteलेकिन चुनाव अधिकारी ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के नाम पर अनाप शनाम तरीके से दिल्ली के मतदाताओं के नाम काटे। इस साल चुनाव आयोग ने एक करोड़, 45 लाख 10 हजार 299 वोटर (मतदाता) बताया है तो फिर मेरा कहना है कि बीते साल के मतदाताओं में से 11 लाख 20 हजार 495 मतदाता कहां गए? किसी को नोटिस नहीं मिली। कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया और एक दल के इशारे पर जिस विधान सभा में लगा कि भाजपा की स्थिति कमजोर हैं और विपक्ष मजबूत तो वहां के वोटर को सीधे कम कर दिया गया। उन्होंने साल 1993 से लेकर अभी तक के वोटरों की संख्या, कितने वोट डाले और कितने फीसद मतदान पड़े, इसका सिलसिलेवार आंकड़े प्रस्तुत किए।परिसीमन और एसआईआर जैसे विषयों के जानकार कांग्रेस नेता चतर सिंह ने कहा कि दिल्ली में जनगणना के हिसाब से 68 से 70 फीसद युवा हैं। यहां एक करोड़ 61 लाख 39 हजार 364 सौ वयस्क मतदाता होना चाहिए। लेकिन एसआईआर के बहाने इन्होंने 47 लाख 56 हजार 722 सौ वोटरों के नाम काट दिए। तर्क दिया गया कि इसका फार्म नहीं आया या वे अपना पुख्ता कागजात दिखा नहीं पाए। सिंह ने कहा कि एक राजनीतिक दल ने अपनी पसंद का वोटर रख लिया बांकी को किसी न किसी बहाने हटा दिया। यह सीधे तौर पर एसआईआर पर प्रश्न चिन्ह है? उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में नौ लाख और बीते विधान सभा चुनाव से पहले बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए। इस तरह के आंकड़े साफ दर्शाता है कि मौजूदा सरकार के इशारे पर चुनाव आयोग काम कर रहा है और दिल्ली में तो मौजूदा आंकड़े ने यह बात साबित कर दिया है। यह चुनाव अधिकारी कार्यालय की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है?

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