आज़मगढ़।पिछले कुछ महीनों में आजमगढ़ जनपद में बिजली से जुड़े लगातार हुए हादसों ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। कहीं 33000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन ने एक युवती की जान ले ली, कहीं टूटे तार ने महिला की जिंदगी छीन ली, तो कहीं सड़क पर गिरे बिजली के तार ने एक छात्र का भविष्य खत्म कर दिया। इन घटनाओं के बाद लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिजली विभाग कब जागेगा?जिले में हुई हालिया घटनाओं पर नजर डालें तो बूढ़नपुर तहसील के डड़चा गांव में 24 वर्षीय पूनम वर्मा आम तोड़ते समय 33000 वोल्ट हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गईं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पेड़ों की समय पर छंटाई और लाइन की सुरक्षा व्यवस्था होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।मेहनाजपुर थाना क्षेत्र के बरवा गांव में 31 वर्षीय कुसुम यादव अपने घर के हैंडपंप पर पानी भर रही थीं। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट के बाद बिजली का तार टूटकर हैंडपंप पर गिर गया और पूरे हैंडपंप में करंट दौड़ गया। गंभीर रूप से झुलसी कुसुम यादव ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर बिजली लाइनों की भयावह स्थिति उजागर कर दी।दीदारगंज क्षेत्र में एक आईटीआई छात्र सुबह घर से बाहर निकला ही था कि पहले से जमीन पर पड़े टूटे बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट इतना तेज था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि तार काफी समय से नीचे पड़ा था, लेकिन उसे हटाया नहीं गया।
महाराजगंज क्षेत्र में हैंडपंप में करंट उतरने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं सिधारी क्षेत्र में खेत में फैले करंट की चपेट में आने से भी एक महिला की जान चली गई। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर बिजली सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कितनी प्रभावी है।इन हादसों के बीच मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र लगातार चर्चा में बना हुआ है। बहोरापुर , मखदुमपुर, मंगरावा, वजीरमलपुर, खालिसपुर, कोइलाडीह, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, दयालपुर, मोहम्मदपुर, फरिहा और अबूसैदपुर सहित कई गांवों के लोग महीनों से झुके हुए पोल, जर्जर एलटी लाइन, 11000 वोल्ट की लटकती लाइन, टूटे इंसुलेटर और बार बार ट्रिपिंग की शिकायत कर रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय जेई और एसडीओ को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं। 1912 हेल्पलाइन, जनसुनवाई पोर्टल और सोशल मीडिया पर लगातार तस्वीरों और वीडियो के साथ शिकायतें भेजी गईं। लेकिन अधिकांश मामलों में एक ही जवाब मिलता रहा कि शिकायत संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है और जल्द समाधान किया जाएगा।read more:https://khabarentertainment.in/excise-department-raids-dhabas/लोगों का आरोप है कि कागजों में शिकायतों का निस्तारण दिखा दिया जाता है, लेकिन कई स्थानों पर जर्जर पोल और खतरनाक बिजली लाइनें आज भी वैसी ही खड़ी हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ गया है। तेज हवा और बारिश के बीच कभी भी कोई पोल गिर सकता है या तार टूट सकता है।ग्रामीणों का कहना है कि हर हादसे के बाद विभागीय जांच, मुआवजे और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन हादसे रोकने के लिए पहले से व्यापक सुरक्षा अभियान क्यों नहीं चलाया जाता। यदि समय पर निरीक्षण, पेड़ों की छंटाई, जर्जर तारों का परिवर्तन और झुके हुए पोलों की मरम्मत की जाए, तो ऐसी कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और जिला प्रशासन से मांग की है कि पिछले महीनों में करंट से हुई प्रत्येक मौत की तकनीकी जांच कराई जाए। यह भी सार्वजनिक किया जाए कि संबंधित स्थानों पर अंतिम बार सुरक्षा निरीक्षण कब हुआ था और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।लोगों की मांग है कि पूरे आजमगढ़ में विशेष विद्युत सुरक्षा अभियान चलाकर 33000 वोल्ट, 11000 वोल्ट और एलटी लाइनों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। झुके हुए पोल, जर्जर तार, टूटे इंसुलेटर और खतरनाक विद्युत ढांचे को तत्काल बदला जाए, ताकि किसी और परिवार को अपने प्रियजन को इस तरह न खोना पड़े।अब जिले के लोगों का कहना है कि हर हादसे के बाद शोक और आश्वासन नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा चाहिए। क्योंकि बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षित व्यवस्था भी होनी चाहिए।