पीड़ित की दलील पर लिया ये फैसला, अब जयपुर हाईकोर्ट जाने की तैयारी

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पीड़ित की दलील पर लिया ये फैसला, अब जयपुर हाईकोर्ट जाने की तैयारी

दिल्ली-एनसीआर
नूंह हिंसा मामले में मोहित उर्फ मोनू मानेसर को कोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया। पीड़ितों की ओर से मोहम्मद इस्माइल व साजदा पत्नी जुनैद की तरफ से एडवोकेट नसरु खान कामां और एडवोकेट यूसूफ खान फिरोजपुर झिरका ने पक्ष रखा। नूंह हिंसा मामले में मोहित उर्फ मोनू मानेसर जुनैद नासिर हत्याकांड का नामजद आरोपी है और वो मुख्य साजिशकर्ता भी है, इसलिए उसकी जमानत मंजूर करने से पूरी जांच प्रभावित होगी। वह अपने रसूख के बल पर दोबारा नेपाल के जरिए विदेश में भाग सकता है और गवाहों को डरा धमका सकता है या मरवा भी सकता है। उसके साथी अनिल, श्रीकांत आदि राजस्थान पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इन दलीलों को सुनने के बाद शनिवार को जिला डीग के अपर जिला सत्र न्यायालय कामां ने जमानत याचिका खारिज कर दी। पीड़ितों की ओर से मोहम्मद इस्माइल व साजदा पत्नी जुनैद की तरफ से एडवोकेट नसरु खान कामां और एडवोकेट यूसूफ खान फिरोजपुर झिरका ने पक्ष रखा। अदालत ने दोपहर तक फैसला सुरक्षित किया। राजस्थान सरकार की ओर से नियुक्त अधिवक्ता गैरहाजिर रहे। इससे पहले आरोपी मोनू मानेसर के वकील कुलभूषण भारद्वाज और एलएन पाराशर ने अदालत को बताया कि इस हत्याकांड से मोहित उर्फ मोनू का कोई लेना देना नहीं है। उसे जानबूझकर फंसाया गया है, इसलिए उसे जमानत दी जाए, ताकि वह आगे अपनी पैरवी भी कर सके। इस दलील पर फैसला दोपहर तक सुरक्षित जरूर रखा गया, लेकिन बाद में जमानत नामंजूर कर दी गई। पुलिस के अधिवक्ता ने मोहित उर्फ मोनू पर हत्या की साजिश में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया और अदालत को बताया कि एफआईआर में आईपीसी की धारा 120बी जोड़ी गई है, इसलिए आरोपी को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। आरोपी मोहित उर्फ मोनू मानेसर के अधिवक्ता कुलभूषण भारद्वाज ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय में जमानत के लिए जल्दी ही याचिका दायर की जाएगी। वहीं तीन अन्य आरोपी राजवीर, दीपक मतलोडा और आचार्य योगेंद्र द्वारा अग्रिम जमानत के लिए लगाई गई याचिकाएं वापस ले ली गई। बता दें कि 12 सितंबर को मोहित उर्फ मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस ने नूंह हिंसा में गुरुग्राम के मानेसर से गिरफ्तार किया था। अदालत में पेशी के दौरान राजस्थान पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गई थी जहां उसे भरतपुर की सेवर जेल रखा गया था। लेकिन जान के खतरे को देखते हुए 22 सितंबर को मोनू को हाईटेक अजमेर जेल शिफ्ट किया गया था।

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