मैनपुरी की तारकशी कला को मेले में मिली पहचान, बांदा के कलाकार भी दिखा रहे जौहर

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मैनपुरी की तारकशी कला को मेले में मिली पहचान, बांदा के कलाकार भी दिखा रहे जौहर

दिल्ली-एनसीआर
मैनपुरी में एक परिवार तीन पीढ़ी से तारकशी कला का काम कर रहा। राजा शिवमंगल सिंह के जमाने में मुंशीलाल ने ये काम शुरू किया। इनसे लालता प्रसाद शाक्य ने ये कला सीखी। बाद में लालता प्रसाद के बेटे राम स्वरूप शाक्य ने पिता की परंपरागत कला को आगे बढ़ाया। मैनपुर की तारकशी कला को ट्रेड फेयर में विशेष पहचान मिल रही। एक जमाने में तारकशी कलाकृतियां केवल मैनपुरी राजघराने के लिए बनतीं, राजघराने के लोग शाही मेहमानों को ये अनूठी कलाकृतियां भेंट करते और अपनी शानो शौकत का एहसास कराते, लेकिन इन्हें बनाने वाले कलाकारों के नाम कोई नहीं जानता। यूपी पवेलियन में कलाकार नेमीचंद्र शाक्य पहली बार तारकशी कला के साथ आए हैं। लोग तारकशी कला से बनते सामान देख रहे हैं। व्यावसायिक दिन होने के कारण दूसरे दिन मेले में खास भीड़ नहीं रही, लेकिन यूपी पवेलियन पहले दिन से सबका पसंदीदा बना है। 75 जिलों के सामान और दुर्लभ कला सबको पसंद आ रही। मैनपुरी में एक परिवार तीन पीढ़ी से तारकशी कला का काम कर रहा। राजा शिवमंगल सिंह के जमाने में मुंशीलाल ने ये काम शुरू किया। इनसे लालता प्रसाद शाक्य ने ये कला सीखी। बाद में लालता प्रसाद के बेटे राम स्वरूप शाक्य ने पिता की परंपरागत कला को आगे बढ़ाया। इन्हें इसके लिए 1977 में नेशनल अवार्ड और 2005 में शिल्प गुरु अवार्ड मिला। पिता और दादा के काम से प्रभावित नेमीचंद्र ने भी इस कला को आगे बढ़ाया। इसके लिए इन्हें भी 2005 में नेशनल अवार्ड मिला। मौजूदा समय नेमीचंद्र का पूरा परिवार परंपरागत कला से जुड़ा है, पूरा परिवार स्टेट अवार्डी है। बांदा के कलाकार भी दिखा रहे जौहर यूपी पवेलियन में चार जिलों की जीआई टैग हासिल कला के जीवंत निर्माण को देखा जा सकता है। मैनपुरी तारकशी कला के अलावा बांदा के सजर पत्थरों की कटाई से बनते आभूषण को लाइव देखा जा सकता है। स्टेट अवार्डी रविशंकर सोनी जीवंत निर्माण कर रहे हैं। बदायूं की जरी जरदोजी का काम साकिब लेकर आए हैं। वे कपड़े पर सुई और रेशम के धागे से भगवान गणेश को उकेर रहे। आगरा के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे। सीएम योगी आज करेंगे पवेलियन का उद्घाटन सीएम योगी आदित्यनाथ बृहस्पतिवार को शाम करीब छह बजे यूपी पवेलियन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे मेले का भ्रमण करेंगे। इस दौरान प्रगति मैदान व आस पास की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले अधिक मजबूत रहेगी। तारकशी कला को मिला है जीआई टैग मैनपुरी की तारकशी कला को जीआई टैग हासिल है। नेमीचंद्र अपनी कलाकृतियों के साथ मेले में आए हैं, जिनकी कीमत 700 रुपये से 55 हजार रुपये तक है। राधा-कृष्ण का चित्र सबसे खास और सबसे मंहगा है, जिसे बनाने में दो महीने का समय लगा है। शीशम की लकड़ी पर चुगना, हथौड़ी, चिमटी की मदद से पीतल के तारों का बारीक काम किया गया है। फिर इसकी पत्थरों से घिसाई कर, स्प्रिट और लाख दाने के घोल से रंगाई की गई है। तब जाकर इन कलाकृतियों को तैयार किया गया है। कन्नौज के इत्र भी बिखेर रहे खुशबू अलमास, नूरा, अल्तमाम, ये कन्नौज से आए इत्र हैं, जिनकी खुशबू लोगों को अपनी तरफ खींच रही है। सागर ने बताया कि उनके पास करीब 800 बरायटी के इत्र हैं, ट्रेड फेयर में करीब 50 से ज्यादा के साथ आए हैं। मिट्टी की खुशबू वाला इत्र, ब्रांड के परफ्यूम के क्लोन में भी इत्र उनके पास उपलब्ध है। जूट से बनी जैकेट लुभा रही लोगों को नई दिल्ली। जूट से केवल बोरी या रस्सी नहीं बनती, जैकेट, जींस और लहंगा भी बनता है। आधुनिक युवा उद्यमियों ने ये साबित करके दिखाया है। ट्रेड फेयर में बिहार पवेलियन में नए स्टार्टअप्स के ऐसे उत्पाद लोगों को लुभा रहे। युवा उद्यमी ज्ञानेंद्र कुमार ने जूट की जींस, पैंट, डिजाइनर जैकेट और लहंगा लॉन्च किया है। इनके फैशन डिजाइनिंग का लोग मुरीद बन रहे। इनके पास जूट से बने झूमर, लैंप पोस्ट, होम डेकोर से लेकर जूट के आधुनिक फैशन डिजाइनिंग परिधान भी उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 399 से लेकर 5000 रुपये तक है।

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