भदोही। रमज़ान शरीफ की फजीलत और इस महीने में क़ुरआन जैसी नेअमत का नाजिल होना अल्लाह का बहोत बड़ा एहसान है मोमिनों के लिए। इस सम्बंध में निर्यातक हाजी अब्दुल मजीद, डॉ0 नेहाल खान, असीम उर्फ बॉबी अंसारी, राशिद कमर अंसारी ने रमजान अजमत को बयान करते हुए कहा कि मुकद्दस रमज़ान की रूहानी चमक से दुनिया फिर रोशन हो चुकी है, और फिज़ा में घुलती अजान और दुआओं में उठते हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे कि मिसाल पेश कर रहे हैं। कहा गया दरअसल रमज़ान बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का जहां मौका देता है वहीं मुक़द्दस रमज़ान बुरे कामों से रोकता है और नेकी की राह दिखाता है। इस पाक और दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने का रास्ता दिखाने वाला माहे रमजान में अल्लाह के नेक बंदे इस फिक्र में रहते हैं की ज्यादा से ज्यादा इबादत कर ली जाए कहीं रमज़ान चला न जाए। निर्यातको ने कहा भूख-प्यास समेत तमाम जिस्मानी जरुरतों तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी आदि बुराइयों से रमज़ान मुबारक रोकने का काम करता है। माहे रमजान में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम जरुरतों को रोकता है।read more :https://khabarentertainment.in/holi-was-celebrated-with-great-enthusiasm-at-divine-global-school-harpur-children-enjoyed-swings-and-delicious-food/ रमजान में अल्लाह अपने इबादतगुजार रोजेदार बन्दों को अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। निर्यातको ने कहा इसके बावजूद भी बहुत से लोग इस माहे मुबारक की खूबियों से अब भी दूर हैं। उनसे यही कहना है कि जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं। इस्लाम की पांच बुनियादों में रोज़ा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जहां जिक्र किया है, वहीं कुरान भी इसी पाक महीने में अल्लाह ने दुनिया में उतारा। रमजान इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ख्याल खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है। रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है।read m ore:https://khabarentertainment.in/holi-was-celebrated-with-great-enthusiasm-at-divine-global-school-harpur-children-enjoyed-swings-and-delicious-food/
साथ ही इस माह में दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है। निर्यातको ने कहा 30 दिनों के माहे रमजान को 10-10 दिन केे तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। जो मुकम्मल हो चुका है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है। जबकि तीसरा अशरा ‘जहन्नुम से आजादी’ का है। इस आखिरी अशरे में रब रोज़ा रखने वाले को जहन्नुम से आजाद कर देता है। महीने भर के रोज़े रखना, रात में तरावीह पढना, क़ुरान की तिलावत करना, एतेकाफ़ में बैठना, अल्लाह से दुआ मांगना, ज़कात देना, अल्लाह का शुक्र अदा करने जैसी बंदा खूब नेकी करता है। इसीलिये इस माह को नेकियों और इबादतों का महीना भी कहते है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान पढना। जिससे क़ुरान पढना न आने वालों को भी क़ुरान सुनने का सबाब मिलता है। यह महीना हमें गरीबो और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी करने का दर्स देता है इसलिए रमज़ान में जकात, खैरात और खूब फितरे से उनकी भरपूर मदद की जाती है। निर्यातको ने दुआ की ऐ पाक परवरदिगार हमें रोज़ा रखने की तौफीक दे। ताकि हमारी दुआओं में असर पैदा हो सके और खुदा के फैज़ से हमारी ईद हो जाये। आमीन