अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), दिल्ली के आह्वान पर आज दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में “Stop Anarchy, Embrace Democracy” के संदेश के साथ प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों ने देश में अराजकता फैलाने वाली प्रवृत्तियों का विरोध करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखने का आह्वान किया। चुनाव आयोग की भूमिका, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर जारी विमर्श के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन अराजकता और अव्यवस्था को राजनीतिक विमर्श का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।अभाविप का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती संस्थाओं के प्रति संवैधानिक दृष्टिकोण, तथ्यों पर आधारित संवाद और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में निहित है। चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की भूमिका पर विमर्श तथ्यों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए। राजनीतिक विरोध के नाम पर संस्थाओं के प्रति अविश्वास का वातावरण बनाने और सार्वजनिक विमर्श को अराजकता की ओर ले जाने वाली प्रवृत्तियों का विद्यार्थी समाज विरोध करता है।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/प्रदर्शन में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) की राजनीति को लेकर भी विरोध दर्ज कराते हुए विद्यार्थियों ने लोकतांत्रिक संवाद और जिम्मेदार राजनीतिक आचरण को प्राथमिकता देने की बात कही।अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, “लोकतंत्र केवल विरोध करने का अधिकार नहीं, बल्कि अपनी असहमति को संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के भीतर व्यक्त करने की जिम्मेदारी भी है। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक स्वार्थों के लिए अराजकता को बढ़ावा देना और जनमानस में भ्रम पैदा करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। दिल्ली विश्वविद्यालय का विद्यार्थी जागरूक है और वह लोकतांत्रिक विमर्श तथा अराजकता के बीच का अंतर समझता है। अभाविप का स्पष्ट संदेश है—अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ।”दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) अध्यक्ष यश डबास ने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विचारों और राष्ट्रीय विमर्श की महत्वपूर्ण भूमि भी है। यहां का विद्यार्थी समाज हर विषय पर अपनी बात रखने और सवाल पूछने में विश्वास रखता है, लेकिन वह अराजकता को किसी भी परिस्थिति में लोकतंत्र का पर्याय नहीं मान सकता। चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर विमर्श तथ्यों, तर्कों और संवैधानिक दृष्टिकोण के आधार पर होना चाहिए। विद्यार्थियों की आवाज स्पष्ट है—देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जाए, संस्थाओं की गरिमा बनी रहे और राजनीतिक मतभेदों का समाधान संवाद के माध्यम से हो।”