गाजीपुर। मुस्तफाबाद उर्फ बड़ागांव में 3 सितंबर 2026 को महिलाओं के साथ बैठक आयोजित की गई। सौहार्द एवं बंधुत्व मंच के संचालक हिमांशु मौर्य के नेतृत्व तथा मंच के मेंटर डॉ. नज्मुस साकिब अब्बासी की मौजूदगी में हुई बैठक में महिलाओं के संगठन निर्माण, नियमित बैठक और गांव की समस्याओं पर सामूहिक रूप से काम करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक की शुरुआत महिलाओं से उनके रोजमर्रा के जीवन और गांव से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत के साथ हुई। महिलाओं के सामने यह बात रखी गई कि यदि वे आपस में जुड़कर नियमित रूप से बैठक करेंगी तो अपनी समस्याओं को खुलकर एक-दूसरे के सामने रख सकेंगी। इससे महिलाओं से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ गांव की सार्वजनिक समस्याओं पर भी सामूहिक रूप से चर्चा कर समाधान की दिशा में पहल की जा सकती है।बैठक में संविधान में निहित समानता के मूल्य को महिलाओं के दैनिक जीवन से जोड़कर समझने का प्रयास किया गया। चर्चा के दौरान महिलाओं से यह जानने की कोशिश की गई कि उनके परिवार और समाज में उनके साथ किस तरह का व्यवहार होता है और किन परिस्थितियों में उन्हें असमानता का सामना करना पड़ता है। बातचीत में महिलाओं ने दहेज प्रथा, महिलाओं की सामाजिक स्थिति और बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।महिलाओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव और आसपास की परिस्थितियों को भी साझा किया। बातचीत का उद्देश्य केवल संवैधानिक मूल्यों की जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं के अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से समानता, न्याय, स्वतंत्रता और गरिमा जैसे मूल्यों को समझना रहा।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette
महिलाओं की आवाज को संगठन से मजबूत करने पर जोर
सौहार्द एवं बंधुत्व मंच के संचालक हिमांशु मौर्य ने कहा कि महिलाओं की समस्याओं को समझने के लिए सबसे जरूरी है कि महिलाएं स्वयं एक-दूसरे के साथ नियमित रूप से संवाद करें। जब महिलाएं संगठित होकर अपनी बात रखेंगी तो परिवार और गांव से जुड़े मुद्दों पर उनकी सामूहिक आवाज मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि संविधान में समानता और गरिमा का जो अधिकार दिया गया है, उसे केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा के जीवन में महसूस करना और व्यवहार में लाना जरूरी है।
संवाद के जरिए सामने आए महिलाओं के अनुभव
मेंटर डॉ. नज्मुस साकिब अब्बासी ने कहा कि महिलाओं के बीच खुला संवाद उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने महिलाओं से उनके मन की बात, अनुभव और भावनाओं को खुलकर सामने रखने को कहा। उन्होंने संगठन निर्माण को आपसी सहयोग से जोड़ते हुए कहा कि महिलाएं नियमित रूप से एक-दूसरे के साथ जुड़ें और अपने मुद्दों पर सामूहिक बातचीत करें, जिससे समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार हो सके।उन्होंने महिलाओं को सरल भाषा में संगठन की आवश्यकता और सामूहिक प्रयास के महत्व को समझाया तथा आगे भी नियमित रूप से बैठक करने और एक-दूसरे का सहयोग करने की बात रखी।
गीत के माध्यम से दिया हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश
बैठक के दौरान संगठन के साथी प्रियांशु विश्वकर्मा ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर गीत प्रस्तुत कर सौहार्द और बंधुत्व का संदेश दिया। गीत के माध्यम से आपसी भाईचारे, एकता और मिल-जुलकर रहने की बात रखी गई। बैठक में गीत को सामाजिक सौहार्द और आपसी जुड़ाव के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया।प्रियांशु विश्वकर्मा ने कहा कि समाज में सौहार्द और बंधुत्व केवल बोलने की चीज नहीं है, बल्कि इसे अपने व्यवहार और आपसी संबंधों में उतारना जरूरी है। अलग-अलग समुदायों के लोग जब एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं तो समाज में भरोसा और आपसी सहयोग मजबूत होता है।बैठक के अंत में महिलाओं ने आगे भी नियमित रूप से आपस में बैठक करने और गांव की समस्याओं के साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर मिलकर चर्चा करने की बात कही। पूरी बैठक में समानता, न्याय, स्वतंत्रता, गरिमा और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को महिलाओं के जीवन और उनके रोजमर्रा के अनुभवों से जोड़कर समझने का प्रयास किया गया।