जनपद लखीमपुर खीरी कुईयाखेड़ा में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। गांव की गलियों, सड़कों और नालियों की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। जगह-जगह फैली गंदगी, कूड़े के ढेर और गंदे पानी से लबालब भरी नालियां प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से नियमित सफाई कार्य नहीं कराया जा रहा है, जिसके चलते नालियां चोक होकर बजबजा रही हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नालियों से उठ रही दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण दूषित हो चुका है।
गांव में बढ़ती गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। शाम होते ही मच्छरों के झुंड लोगों का जीना मुश्किल कर देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteस्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत और संबंधित विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता और सफाई व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए गांव में विशेष सफाई अभियान चलाने, नालियों की सफाई कराने और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लोगों को गंदगी, दुर्गंध और बीमारी के खतरे से राहत मिल सके।ग्रामीणों का बड़ा सवाल”जब स्वच्छ भारत मिशन और ग्राम पंचायतों की सफाई व्यवस्था पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो आखिर कुईयाखेड़ा की गलियों में पसरी गंदगी, बजबजाती नालियां और बदहाल सफाई व्यवस्था किसकी लापरवाही का परिणाम है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या ग्रामीण इसी तरह नारकीय स्थिति में जीवन जीने को मजबूर रहेंगे?”