शक्तिनगर, सोनभद्र। लगातार हो रही बारिश ने एनटीपीसी के विस्थापित क्षेत्र परसवार राजा की बैगा बस्ती के परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के पानी से कई कच्चे-पक्के मकानों की दीवारें क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने सिर छिपाने तक का संकट खड़ा हो गया है। सुरक्षित ठिकाना नहीं मिलने पर महिलाएं, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य खड़िया बाजार चैराहे पर दुकानों के बंद शटर के सामने रात गुजारने को मजबूर हैं।चैराहे पर रात में परिवारों का सामान बिखरा और महिलाएं-बच्चे एक-दूसरे से सटकर बैठे नजर आ रहे हैं। दिनभर जहां इस चैराहे पर लोगों की आवाजाही रहती है, वहीं रात में दुकानें बंद होने के बाद यही स्थान इन परिवारों का अस्थायी आशियाना बन गया है। बारिश के बीच खुले में रात गुजारने की मजबूरी ने प्रभावित परिवारों की बेबसी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार बारिश के चलते परसवार राजा क्षेत्र में कई घरों की दीवारें कमजोर होकर ढह गईं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। मकानों की हालत ऐसी हो गई कि वहां रहना जोखिम भरा हो गया। इसके बाद प्रभावित परिवार अपना जरूरी सामान लेकर खड़िया बाजार की ओर निकल आए।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/ सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें चैराहे पर ही रात बितानी पड़ रही है। खुले चैराहे पर रात गुजारने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी छोटे बच्चों और महिलाओं को लेकर है। बारिश के दौरान खुले में रहने से सुरक्षा के साथ-साथ मौसम की मार का भी सामना करना पड़ रहा है। परिजन बच्चों को किसी तरह बारिश से बचाते हुए रात काटने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परसवार राजा एनटीपीसी का विस्थापित क्षेत्र है और यहां रहने वाले परिवार लंबे समय से आवास और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब बारिश ने उनकी परेशानी को और विकराल कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से प्रभावित परिवारों का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। साथ ही सुरक्षित अस्थायी आश्रय, भोजन और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा क्षतिग्रस्त मकानों की स्थिति का स्थायी समाधान कराने की गुहार लगाई है। खड़िया बाजार चैराहे पर रात के अंधेरे में महिलाओं और बच्चों समेत परिवारों के खुले में सोने की तस्वीरें व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं। सवाल यह है कि विस्थापन का दंश झेल रहे इन परिवारों को बारिश में भी खुले आसमान के नीचे रात गुजारने से आखिर कब राहत मिलेगी।