शेरकोट । नगर के मोहल्ला फतेहनगर स्थित गढ़ी मंदिर में चल रही मोक्षदायिनी शिवमहापुराण कथा मंदाकिनी के छठे दिन शनिवार को श्रद्धालुओं ने माता पार्वती जन्म एवं उनकी कठोर तपस्या का प्रसंग श्रवण किया। कथा व्यास पीठाधीश्वर पंडित राजेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि दृढ़ संकल्प, श्रद्धा और तप के बल पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
कथाव्यास ने बताया कि माता सती के देह त्याग के बाद उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही उनका मन भगवान शिव की भक्ति में रमा रहता था।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/ देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में माता पार्वती ने वर्षों तक कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।उन्होंने कहा कि माता पार्वती का जीवन नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। शिवमहापुराण में वर्णित यह प्रसंग प्रत्येक व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देता है।कथा के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर प्रसंग सुनते रहे। शिव-पार्वती के जयकारों से पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।