बलिया में सरयू नदी कहर,100 से अधिक परिवारों ने उजाड़ा अपना आशियाना

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 जनपद में सरयू नदी की कटार सी धारा निरंतर कटान कर रही है।सरयू नदी न केवल कृषि योग्य भूमि को अपने में समाहित कर रही बल्कि लोगों के आशियाने को भी निगल रही। आलम यह है कि तटबन्धीय इलाकाई लोग अपने ही आशियाने को अपने हाथों तोड़कर अन्यत्र सुरक्षित जगहों पर पलायन कर रहे हैं। गोपालनगर टाड़ी में नदी की धारा में कई लोगों का मकान समाहित हो चुका है।दर्जनों मकान नदी के मुहाने पर है।जिनको कभी भी नदी निगल सकती है। सोमवार की सुबह प्राथमिक विद्यालय नदी में समाहित हो गया।जिसका आंशिक हिस्सा ही अब बचा हुआ है।read more:https://khabarentertainment.in/meritorious-students-honored-at-klgm-inter-college-incentive-amount-of-%e2%82%b961000-distributed/
करीब 100 परिवार छोड़ चुके हैं अपना घर
बांसडीह तहसील क्षेत्र के भोजपुरवा गांव सरयू नदी द्वारा किये जा रहे निरंतर कटान की डर से परमात्मा यादव,राबड़ी देवी,मण्टू यादव सहित करीब एक सौ परिवार अपने आशियाने को जमींदोज कर चुके हैं। उक्त परिवार घर के सामानों को भी बंधे सहित अन्य जगहों पर रख दिए हैं। हालांकि उक्त लोग अपना मकान तोड़ चुके हैं लेकिन उक्त मकान की जमीन अभी बची हुई है।यानि जमीन अभी नदी की धारा में विलीन नहीं हुआ है।
अपने हाथों घर बनाया और अपने ही हाथों तोड़ना पड़ा
बांसडीह तहसील क्षेत्र के भोजपुरवा गांव निवासी परमात्मा यादव ने कहा कि अपने हाथों घर बनाया और अपने ही हाथों तोड़ना पड़ा।मजबूरी में अपना तोड़ना ही है,अपना जान बचाना ही है। सरकार से सुविधा मिलेगी तो भी ठीक नहीं मिलेगा तो भी ठीक,एक दिन तो मरना ही है।मण्टू यादव ने कहा कि पन्द्रह दिन पहले ही मकान तोड़ चुके हैं। पर्वतपुर में दूसरे के घर पर सामान रखें हैं।राबड़ी देवी ने कहा कि मकान तोड़ चुके हैं।रोड पर सामान रख दिये है।अब स्थिति यह है कि न रहने की व्यवस्था है और न खाने की व्यवस्था है।मकान इस लिए छोड़ दिया कि अगर पानी आ जायेगा तो कैसे हम लोग भागेंगे।न चलने की व्यवस्था है और न ले जाने की व्यवस्था है तो कहां ले जाकर के रखेंगे।
अब जानिए गोपाल नगर टाड़ी का हाल..
गोपालनगर टाड़ी में नदी की धारा में कई लोगों के मकान के साथ ही प्राथमिक विद्यालय भी नदी में समाहित हो चुका है। रामनाथ, निवास लाल यादव, मुसाफिर यादव, रामनाथ यादव और जवाहर यादव सहित करीब आधा दर्जन लोगों के मकान भी कटान के मुहाने पर हैं और कभी भी नदी में समा सकते हैं।
कृषि योग्य भूमि को लगातार काट रही नदी
बांसडीह तहसील क्षेत्र व बैरिया तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों की कृषि योग्य भूमि को नदी काटकर लगातार अपने में समाहित कर रही है।सुरेमनपुर दियरांचल में नौका गांव (झरकटहां), धूपनाथ के डेरा, वशिष्ठ नगर, गोपाल नगर, गोपाल नगर टाड़ी और सिवाल मठिया जैसे कई गांवों में कृषि योग्य भूमि लगातार नदी में समाहित हो रही है।वहीं बांसडीह तहसील के भोजपुरिया, सुल्तानपुर, से लेकर सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों की कृषि योग्य भूमि नदी में समाहित हो रही है।जिससे किसान भूमिहीन हो रहे हैं।

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