22 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधि, 99 स्वर्ण पदकों से सजे माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय के दीक्षांत

Share

http://Over 22,000 students receive degrees; Maa Shakumbhari University convocation adorned with 99 gold medals

रनपुर। माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह मंगलवार को सेठ गंगा प्रसाद माहेश्वरी सभागार (जनमंच) में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने वर्चुअल माध्यम से की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 22,315 छात्र-छात्राओं को स्नातक एवं परास्नातक की उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 99 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। सभी उपाधियों को डिजीलॉकर में भी उपलब्ध कराया गया। समारोह में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी मुख्य अतिथि तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी और अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम. बोबड़े विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।read more:https://khabarentertainment.in/wp-content/uploads/2026/07/City-roads-need-relief-from-heavy-vehicles-Ritesh-Mishra-1.webp   राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन भर सीखते रहो का संदेश देते हुए नई तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार के साथ स्वयं को लगातार विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने 16 जुलाई से शुरू हुए नशा मुक्त भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाने की अपील करते हुए युवाओं से नशे के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। साथ ही एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत प्रत्येक विद्यार्थी से पौधारोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प लेने की बात कही। उन्होंने जल संरक्षण, स्वच्छता, टीबी मुक्त भारत अभियान और महिला स्वास्थ्य जैसे विषयों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया। समारोह में 7,582 छात्रों और 14,733 छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। मेधावी विद्यार्थियों को कुलाधिपति, कुलपति और विभिन्न स्मृति स्वर्ण पदकों सहित कुल 99 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इस दौरान विश्वविद्यालय एवं जिला प्रशासन के सहयोग से 700 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट भी वितरित किए गए तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और नवाचार का युग है। विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रहकर व्यक्तित्व विकास, खेल, समाज सेवा और शोध गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान सबसे बड़ी पूंजी है और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता का आधार बनती है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देते हुए कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। उन्होंने युवाओं से स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम. बोबड़े ने विद्यार्थियों से समय के साथ स्वयं को बदलने, नई तकनीकों को अपनाने और टीम वर्क, समय प्रबंधन तथा जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बनतीं, यदि व्यक्ति में सीखने और आगे बढ़ने का जज्बा हो। दीक्षांत समारोह के दौरान भाषण, निबंध, चित्रकला, काव्य लेखन, लोकनृत्य और देशभक्ति गीत प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *