बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष दानिश अंसारी ने मध्य प्रदेश में लागू नए वक्फ बोर्ड मॉडल का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भी इसी तर्ज पर बोर्ड का गठन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत बनने वाले वक्फ बोर्ड में पिछड़े एवं पसमांदा मुस्लिम समाज, महिलाओं तथा अन्य वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। साथ ही दो गैर-मुस्लिम सदस्यों के नामांकन का भी प्रावधान रहेगा। सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। सरकार के इस फैसले का ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने स्वागत किया है। महाज़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने इसे सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि अब तक वक्फ संपत्तियों पर अशराफ वर्ग का कब्जा रहा, जबकि इनका लाभ गरीब और वंचित पसमांदा मुसलमानों को मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि वक्फ संपत्तियों का लाभ उनके वास्तविक हकदारों तक पहुंचे।read more:https://khabarentertainment.in/call-to-embrace-dr-syama-prasad-mookerjees-ideas-bjp-organizes-an-ideological-seminar/वसीम राईन ने कहा कि वक्फ बोर्ड में महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलने से उन्हें बराबरी का अधिकार मिलेगा। उन्होंने बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के प्रावधान का भी स्वागत करते हुए कहा कि इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए कानून के लागू होने के बाद पसमांदा समाज को उसका अधिकार मिलेगा और वक्फ बोर्ड अपने उद्देश्य को पूरा कर सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा, बसपा, कांग्रेस और टीएमसी ने वर्षों तक पसमांदा समाज का केवल राजनीतिक इस्तेमाल किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पसमांदा समाज को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पसमांदा समाज के लोगों को दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दो एमएलसी, एक मंत्री तथा तीन आयोगों के अध्यक्ष समेत विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर उन्हें सम्मान और प्रतिनिधित्व प्रदान किया है।