शुगर मिल की गर्म राख ने ली दूसरी मासूम जान, जन्मदिन पर ही रिहान की मौत; क्षेत्र में पसरा मातम

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बिजनौर। जनपद बिजनौर के नूरपुर रोड स्थित चक्कर चौराहे के पास शुगर मिल की गर्म राख में झुलसने से घायल बच्चों में से 13 वर्षीय रिहान पुत्र इमरान की मंगलवार को देहरादून में उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे पहले 24 जून को इसी हादसे में 13 वर्षीय शाद ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। रिहान की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि दो अन्य बच्चे साहिल और उज़ैद अब भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/consumers-booked-for-gas-refill-booking/
यह दर्दनाक हादसा 1 मई को हुआ था। लड़ापुरा मोहल्ले के पांच मासूम बच्चे पास के एक बाग में आम खाने गए थे। खेलते-खेलते वे शुगर मिल के पास पड़े गर्म राख के ढेर तक पहुंच गए। राख को सामान्य मिट्टी समझकर जैसे ही बच्चे उसके ऊपर गए, वे उसकी चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोगों ने बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।सभी घायलों को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिहान की हालत लगातार गंभीर बनी रही, जिसके चलते उसे बेहतर इलाज के लिए पहले बिजनौर से दिल्ली, फिर ऋषिकेश और अंततः देहरादून रेफर किया गया। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उसने अंतिम सांस ले ली।इस हादसे का सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि जिस दिन रिहान का जन्मदिन था, उसी दिन उसकी जिंदगी का सफर भी समाप्त हो गया। जिस घर में जन्मदिन की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे मोहल्ले में गम का माहौल है।पुलिस ने रिहान का शव घर पहुंचने पर पोस्टमार्टम कराने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने इसके लिए सहमति नहीं दी। शहर कोतवाल अवनीत मान ने बताया कि परिजनों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं हुए।हादसे में घायल बिलाल की हालत में अब काफी सुधार बताया जा रहा है, जबकि साहिल और उज़ैद का उपचार अभी भी जारी है। परिजन उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों द्वारा खुले में छोड़े जाने वाले खतरनाक अपशिष्ट और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गर्म राख के ढेर को सुरक्षित ढंग से निस्तारित किया गया होता या उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद दो मासूमों की जान न जाती और कई परिवार इस दर्दनाक त्रासदी से बच जाते।

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