मंत्रिमंडल ने हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को दी मंजूरी

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नई दिल्ली , – मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। यह संशोधन भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 19 मई, 2023 को ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय के अनुपालन में किया गया है।पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा राज्य की न्यायिक सेवा से जुड़े नियमों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन प्रस्तावित किए गए थे। इनका उद्देश्य उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों की सेवा शर्तों और कैरियर प्रगति को और बेहतर बनाना है।स्वीकृत संशोधनों के तहत हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 के नियम 16(1), 16(2) और 17 में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा नियमों में एक नया परिशिष्ट (एपेंडिक्स) जोड़ा गया है तथा नियमों के साथ संलग्न अनुसूची (शेड्यूल) में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं।नई व्यवस्था के तहत हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए संशोधित वेतन संरचना लागू की जाएगी। इसमें प्रवेश स्तर (एंट्री लेवल), चयन ग्रेड (सेलेक्शन ग्रेड) और सुपर टाइम स्केल पर कार्यरत जिला न्यायाधीशों के वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।मंत्रिमंडल ने चयन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल पदों से संबंधित प्रावधानों को भी मंजूरी दी है। संशोधित नियमों के अनुसार, 1 जनवरी 2020 से जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 35 प्रतिशत पद चयन ग्रेड के लिए निर्धारित होंगे। यह ग्रेड उन अधिकारियों को दिया जाएगा, जिन्होंने जिला न्यायाधीश संवर्ग में लगातार कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। चयन मेरिट और वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा।read more:https://pahaltoday.com/on-the-147th-foundation-day-of-the-bjp-workers-lit-lamps-and-paid-tribute-to-great-men/इसी प्रकार, जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 15 प्रतिशत पद सुपर टाइम स्केल के लिए निर्धारित होंगे। यह लाभ उन अधिकारियों को मिलेगा, जिन्होंने चयन ग्रेड में लगातार कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। इसके लिए भी मेरिट और वरिष्ठता को आधार बनाया जाएगा।संशोधित प्रावधानों के अनुसार, वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) की गणना 3 प्रतिशत की दर से की जाएगी। प्रत्येक वर्ष की वेतन वृद्धि पिछले वर्ष के मूल वेतन के आधार पर जोड़ी जाएगी। इन संशोधनों से हरियाणा की उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों को बेहतर सेवा लाभ मिलेंगे तथा न्यायिक सेवा में कैरियर उन्नति की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।

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