आम जनता को लगा बड़ा झटका, एक हफ्ते में दूसरी बार महंगे हुए पेट्रोल और डीजल

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अशोक भाटिया , 

आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। एक हफ्ते के भीतर कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिसके कारण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के सभी प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम काफी बढ़ गए हैं। इस कारण आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई का बड़ा बोझ बढ़ गया है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। आम लोगों के लिए चिंता की बात यह है कि एक हफ्ते के भीतर ईंधन की कीमतों में की गई यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इस नए बदलाव के बाद देश के चारों प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल और डीजल खरीदना पहले से महंगा हो गया है। लगातार बढ़ते दामों के कारण आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से गड़बड़ाने लगा है और आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली में इस नई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे का उछाल आया है। इस बढ़ोतरी के साथ ही दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल का भाव बढ़कर 98।64 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं अगर कोलकाता की बात करें तो वहां पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक 96 पैसे की तेजी दर्ज की गई है। इस बड़ी बढ़त के बाद कोलकाता में अब पेट्रोल खरीदारों को एक लीटर के लिए 109।70 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इन दोनों ही बड़े शहरों में लगातार बढ़ रही कीमतें मध्यम वर्ग के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर रही हैं। वैसे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दाम हमेशा से ही ऊंचे रहे हैं और इस बार भी यहां बड़ा झटका लगा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद यहां नया रेट बढ़कर 107।59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में भी पेट्रोल की कीमतों में राहत नहीं मिली है। चेन्नई में पेट्रोल के दाम में 82 पैसे की बढ़ोतरी हुई है और अब वहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 104।49 रुपये हो गई है। पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतों में भी तेल कंपनियों ने बड़ा बदलाव किया है, जिसका सीधा असर  कमर्शियल वाहनों और माल ढुलाई पर पड़ेगा। राजधानी दिल्ली में डीजल की कीमत में 91 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यहां नया दाम 91।58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं कोलकाता में डीजल के दाम 94 पैसे बढ़कर 96।07 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं। मुंबई में भी डीजल की कीमतों में 94 पैसे की ही भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके बाद वहां एक लीटर डीजल का भाव 94।08 रुपये हो गया है। चेन्नई में डीजल की कीमत में 86 पैसे की बढ़ोतरी हुई है और वहां अब नया रेट 96।11 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है। आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि यह बढ़ोतरी बहुत ही कम समय के भीतर हुई है। एक हफ्ते के अंदर तेल कंपनियों द्वारा दामों को दूसरी बार बढ़ाया गया है।read more:https://pahaltoday.com/dm-and-sp-held-a-meeting-with-traders-regarding-strengthening-of-trader-security/ डीजल की कीमतों में इस तरह लगातार हो रही बढ़ोतरी से देश में माल ढुलाई महंगी होने का पूरा डर बना हुआ है। जब डीजल महंगा होता है, तो सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च बढ़ जाता है, जिससे फल, सब्जियां और रोजाना की दूसरी जरूरी चीजों के दाम भी बाजार में बढ़ने लगते हैं। इस कारण आने वाले दिनों में आम जनता को महंगाई की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। जैसे-जैसे ईंधन महंगा होता जाता है, बसों, टैक्सियों और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, जिससे बदले में दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और भी महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ सकती हैं। इससे पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की वजह बताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट को ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, नेचुरल गैस और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका असर भारत के क्रूड ऑयल, एलपीजी और नेचुरल गैस आयात पर भी पड़ा है।हालांकि सरकार ने लोगों को राहत देते हुए कहा है कि देश में ईंधन सप्लाई की कोई कमी नहीं है। सुजाता शर्मा के मुताबिक सभी रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और पर्याप्त मात्रा में क्रूड ऑयल का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी पर सप्लाई संकट जैसी स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले चार सालों में रिटेल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था, जिसकी भरपाई करने के लिए अब रेट धीरे-धीरे बढ़ाए जा रहे हैं। बीते दिन 3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नुकसान थोड़ा कम होकर  750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर आ गया। अब देखना है कि आज की गई बढ़ोतरी के बाद इस नुकसान को पाटने में कितनी मदद मिलती है। बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जो अब 100-110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85 परसेंट से अधिक तेल बाहर से आयात करता है इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। व्यापारियों के  मुताबिक डीजल महंगा होने से माल ढुलाई प्रभावित होगी। इसका असर सब्जी, दूध, किराना और निर्माण सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं पर पहुंचेगा। यह स्थिति महंगाई को और बढ़ा सकती है। उद्यमियों का कहना है कि पहले से बढ़ी उत्पादन लागत के बीच ईंधन महंगा होने से दोहरी मार पड़ रही है। इसका असर बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।  पेट्रोल महंगा होने से बाइक, स्कूटर और कार चलाने वालों का खर्च बढ़ जाएगा। अगर ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो ऑटो, टैक्सी और कैब किराए में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर रोज ऑफिस आने-जाने वाले लोगों के बजट पर पड़ेगा।भारत में फल, सब्जियां, दूध और जरूरी सामान का बड़ा हिस्सा ट्रकों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का असर सीधे ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है। जब माल ढुलाई महंगी होती है, तो कंपनियां और व्यापारी अतिरिक्त खर्च ग्राहकों से वसूलने लगते हैं। इसका असर धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दिखाई देता है। यानी आने वाले समय में सब्जियां, फल, दूध और पैकेज्ड फूड महंगे हो सकते हैं। हाल ही में अमूल और मदर डेयरी ने भी दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं। कंपनियों ने इसके पीछे बढ़ती लॉजिस्टिक्स और ईंधन लागत को बड़ी वजह बताया है।ईंधन महंगा होने से ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों का खर्च भी बढ़ जाता है। ऐसे में स्विगी, जोमैटो और दूसरी डिलीवरी कंपनियां डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकती हैं, डिस्काउंट कम कर सकती हैं या न्यूनतम ऑर्डर वैल्यू बढ़ा सकती हैं। इसका असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजमर्रा की खरीदारी और खाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। डीजल महंगा होने का असर गांवों और किसानों पर ज्यादा पड़ सकता है। किसान ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और फसल ढुलाई के लिए डीजल पर काफी निर्भर रहते हैं। ऐसे में खेती की लागत बढ़ सकती है और इसका असर आगे चलकर खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। उधर  आने वाले दिनों में दिल्ली की आम जनता को ऑफिस, घर, दुकान, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली में ऑटो और टैक्सी चालक हड़ताल करने की प्लानिंग बना रहे हैं। कमर्शियल गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवरों की यूनियन सीएनजी की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर ऑटो और टैक्सी के किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 3 दिनों की हड़ताल पर जाने की योजना बना रहे हैं। ये हड़ताल 21 मई से लेकर 23 मई तक हो सकती है। ऐसे में, कहीं आने-जाने के लिए ऑटो और टैक्सी पर निर्भर रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।’ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चिट्ठी लिखकर अपनी मांगें रखीं। चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा, ”सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से ऑटो-टैक्सी ड्राइवर अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए, दिल्ली के अन्य संगठनों के समन्वय से चालक शक्ति यूनियन ने 21, 22 और 23 मई को चक्का जाम करने का आह्वान किया है और इन दिनों ऑटो-टैक्सी बंद रखने की अपील की है।”

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