खनन माफियाओं पर मेहरबान सिस्टम? शिकायत के बाद भी नहीं रुके डंपर

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बाराबंकी। कुर्सी थाना क्षेत्र में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन और ओवरलोड डंपरों का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। हालात यह हैं कि गांव के अंदर से तेज रफ्तार में गुजर रहे मिट्टी से लदे भारी वाहन ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए खतरा बन चुके हैं। कई बार शिकायत और प्रदर्शन के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई न होने से नाराज़ ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार देर रात करीब 8ः30 बजे महमूदपुर बनौगा गांव के ग्रामीणों ने एक बार फिर मिट्टी से लदे डंपरों को रोककर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन पर खनन कारोबारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सड़क जाम की चेतावनी भी दी। ग्रामीणों के अनुसार बीते कई दिनों से गांव के अंदर से होकर रात-दिन मिट्टी से लदे ओवरलोड डंपर गुजर रहे हैं। इन भारी वाहनों की वजह से गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन लगातार अनदेखी कर रहा है। दो दिन पहले भी ग्रामीणों ने डंपर रोककर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद व्हाट्सएप के माध्यम से एसडीएम फतेहपुर और जिलाधिकारी बाराबंकी के सीयूजी नंबरों पर शिकायती पत्र भी भेजे गए थे, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ।read more:https://pahaltoday.com/mp-mahato-not-ready-to-accept-pm-modis-appeal/बुधवार शाम करीब 8 बजे मिट्टी लेकर जा रहे एक तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से बनौगा गांव का एक बालक बाल-बाल बच गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने डंपरों को रोककर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर स्थानीय चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाकर मामला शांत कराया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे सड़क पर उतरकर चक्का जाम करेंगे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर इन ओवरलोड डंपरों और कथित अवैध खनन कारोबार को किसका संरक्षण प्राप्त है। लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में लगातार खनन और परिवहन हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही गांव के अंदर से डंपरों का संचालन बंद नहीं कराया गया तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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