बाराबंकी। देश की राजनीति में धनंजय शर्मा आज एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिन्होंने अपने पिता प्रखर समाजवादी नेता राजनाथ शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए खुद की एक अलग राजनीतिक पहचान बनाई है। खिलाड़ी से नेता बने धनंजय शर्मा अब न सिर्फ यूपी और महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपने नेतृत्व का परिचय दिया है। गुरूवार को एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा अजीत पवार जोकि महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री है, उन्होंने धनंजय शर्मा को राट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में किसान सभा का राष्ट्रीय सचिव बनाया है। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगता प्रकोष्ठ की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। धनंजय शर्मा के मनोनयन पर एनसीपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुशी का इजहार किया है। ज्ञातव्य हो कि धनंजय शर्मा निपद बाराबंकी के सबसे अहम सियासी परिवार से संबंध रखते है। वह प्रखर समाजवादी नेता और गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा के बेटे है। राजनाथ शर्मा जिन्होंने 60 के दशक में डॉ राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, मधु लिमये, जॉर्ज फर्नांडिस के साथ काम किया और जनता पार्टी के सचिव रहे। राजनाथ शर्मा के बेटे धनंजय शर्मा ने राजनीति की शुरूआत पूर्व केन्द्रीय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस की समता पार्टी से की थी। छात्र जीवन में राजनीति से जुड़े के बाद वह कुछ समय के लिए शिक्षण कार्य में लग गए। उन्होंने सतना (मध्यप्रदेश) के नवोदय विद्यालय में खेल प्रशिक्षक के तौर पर काम किया, लेकिन वहां ज्यादा दिन नहीं रूक पाए। और फिर घर वापसी करके पुनः राजनीति शुरू की। साल 2005 में धनंजय शर्मा ने एनसीपी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और राज्य कमेटी में छात्र और फिर युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। कुछ वर्षों बाद वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए।read more:https://pahaltoday.com/akhilesh-saddened-by-his-brothers-death-said-whatever-the-law-and-the-family-decide-he-will-accept-it/ इस बीच कुछ राजनीतिक उहापोह की स्थिति में उन्होंने एनसीपी से किनारा कर लिया और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। नए दल शामिल होने और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनने बाद पार्टी में विघटन शुरू हो गया। जिसके बाद वह सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। और साल 2019 में कैसरगंज लोकसभा से संसद सदस्य का चुनाव लड़े। लेकिन उनका एनसीपी से मोह भंग नहीं हुआ। आखिरकार धनंजय शर्मा ने एक बार फिर एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकत की और उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। कुछ ही समय बाद पार्टी में पारिवारिक विवाद के चलते एनसीपी की अूट हुई। एनसीपी का मूल नाम अजीत पवार को मिला और धनंजय उनके साथ आ गए। नई एनसीपी के पुर्नगठन में धनंजय शर्मा ने अजीत पवार का मजबूती से साथ दिया। पार्टी प्रमुख अजीत पवार ने उन्हें पार्टी में ही नहीं बल्कि संगठन और विभिन्न चुनाव में भी अहम जिम्मेदारी सौंपी। जिसमें उन्होंने अपनी प्रतिभा और योग्यता को प्रदर्शित किया है। बता दें कि धनंजय शर्मा की वाक्पटुता, समझ, अद्भुत स्मरण शक्ति, लगभग हर विषय पर कुछ अलग ज्ञान और सबसे बढ़कर नए लोगों से खासकर नई पीढ़ी से तालमेल बिठाने की अद्भुत क्षमता का लोहा तो हर एक मानता है। वह ऐसे पॉलिटिशियन हैं, जिनकी क्षमताओं का पूरा सदुपयोग अभी पार्टी नही कर पा रही है। जहां जहां उन्हें ज़िम्मेदारी दी गई, सौ प्रतिशत दिया है धनंजय शर्मा ने, मगर उनका सही उपयोग राजनीति के जोड़ घटाव और दांव पेंच में अभी बाकी है। धनंजय शर्मा बेहतरीन कम्युनिकेटर हैं, दो विपरीत ध्रुव को एक मेज़ पर बैठाकर किसी भी निर्णायक मोड़ पर लाने की इनमें अद्भुत क्षमता है। बहरहाल, धनंजय शर्मा को मिली इस नई जिम्मेदारी से पार्टी कार्यकर्ता और सर्मथकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्हें उम्मीद है कि एनसीपी सुप्रीमो सुनेत्रा पवार आने वाले समय में धनंजय शर्मा को किसी बड़े राजनैतिक पद की जिम्मेदारी भी सौंपेगी। ताकि वह पार्टी उनकी राजनैतिक क्षमता का सद्पयोग कर सके।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं धनंजय शर्मा धनंजय शर्मा उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो राजनीति में नए विचार और ऊर्जा लेकर आना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि राजनीतिक परिवार में जन्म लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि खुद के दम पर पहचान बनाना जरूरी होता है। उनकी नेतृत्व शैली आधुनिक सोच और पारंपरिक मूल्यों का संगम है। यही कारण है कि वे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी युवा राजनीति के प्रतीक बन चुके हैं। एक युवा नेता ने पिता की विरासत को सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाते हुए खुद की पहचान बनाई। खेल की दुनिया से निकलकर राजनीति की जटिल दुनिया में उन्होंने अपनी जगह बनाई और वे उस विरासत को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।