धामपुर । जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का दावा करने वाला ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ इस बार भी सवालों के घेरे में आ गया। तहसील धामपुर में आयोजित कार्यक्रम में कुल 183 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन मौके पर सिर्फ 11 का निस्तारण हो सका। यानी 170 से अधिक फरियादी फिर उम्मीद के भरोसे घर लौटे।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शिकायतों का “समयबद्ध और गुणवत्तापरक” निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, लेकिन आंकड़े खुद बता रहे हैं कि जमीनी हकीकत अभी भी निर्देशों से कोसों दूर है।read more:https://pahaltoday.com/relief-to-thirsty-people-in-the-scorching-heat-bharat-vikas-parishad-bhadohi-launched-water-service-at-three-places/समाधान दिवस का मकसद था। “एक ही छत के नीचे समस्याओं का तत्काल समाधान”, लेकिन 183 में से महज 11 मामलों का मौके पर निपटारा इस दावे को खोखला साबित करता दिखा। बाकी शिकायतों को एक सप्ताह में निस्तारित करने का आश्वासन दिया गया, जो अक्सर कागज़ों तक सीमित रहने के आरोप झेलता रहा है।डीएम ने साफ कहा कि यदि कोई शिकायत दोबारा आती है, तो यह संबंधित विभाग की लापरवाही का संकेत है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि वे मौके पर जाकर जांच करें, शिकायतकर्ता से सीधे संवाद करें और स्थानीय स्तर पर सत्यापन करें। वरना कार्रवाई तय मानी जाए। जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन स्तर से शिकायतों की गुणवत्ता की सीधे निगरानी हो रही है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में लंबित शिकायतें यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या विभागीय अमला निर्देशों को गंभीरता से ले रहा है? कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय, सीएमओ डॉ. कौशलेंद्र सिंह समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे। बावजूद इसके, मौके पर समाधान की दर बेहद कम रहना प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। सम्पूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य भले ही जनसमस्याओं का त्वरित समाधान हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह मंच अभी भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा। यदि यही हाल रहा, तो ‘समाधान’ दिवस सिर्फ ‘शिकायत’ दिवस बनकर रह जाएगा।