नई दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के कार्यालय में आयोग के सदस्यों से मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों की वेतन संरचना, सेवा शर्तों तथा समग्र कार्य परिस्थितियों से जुड़ी चिंताओं और सुझावों को साझा करना था।बैठक के दौरान DUTA ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से यह रेखांकित किया कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य, विशेषकर लगातार बढ़ती महंगाई और समग्र आर्थिक विकास को देखते हुए शिक्षकों के लिए एक न्यायसंगत, तर्कसंगत और महंगाई-संगत वेतन संशोधन ढाँचे की तत्काल आवश्यकता है। प्रतिनिधिमंडल ने एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू करने, वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाने तथा पे मैट्रिक्स में संरचनात्मक सुधार की मांग की, जिससे विशेषकर वरिष्ठ स्तर पर वेतन ठहराव की समस्या का समाधान हो सके। DUTA ने यह भी आग्रह किया कि पदोन्नति एवं पेंशन लाभों के निर्धारण में सेवा की पूरी अवधि को मान्यता दी जाए, जिसमें एड-हॉक, अस्थायी नियुक्तियाँ तथा पोस्टडॉक्टरल अनुभव भी शामिल हों। आयोग ने इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख दर्शाया। शिक्षकों के पेशेवर विकास को ध्यान में रखते हुए, संघ ने उच्च शैक्षणिक योग्यता (जैसे Ph.D. एवं M.Phil) से जुड़े प्रोत्साहनों को जारी रखने और सुदृढ़ करने, तथा वार्षिक शैक्षणिक एवं शोध अनुदान की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही, करियर उन्नति और लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों को विशेष रूप से उठाया गया, खासकर महिला शिक्षकों के लिए करियर के उत्तरार्ध में आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए।read more:https://pahaltoday.com/bulldozer-runs-on-illegal-construction-on-canal-track/DUTA ने सेवा शर्तों को अधिक समावेशी और सहायक बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए दो वर्षों तक पूर्ण वेतन सहित सुदृढ़ चाइल्ड केयर लीव (CCL), सभी कर्मचारियों के लिए पेरेंट-केयर लीव, तथा महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश प्रावधान की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने आवास भत्ता (HRA) में वृद्धि और उसे यथार्थपरक बनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, विशेषकर महानगरों में बढ़ती आवास लागत को देखते हुए। साथ ही, दिव्यांग कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त भत्ते, समूह बीमा कवरेज को मजबूत करने तथा एक व्यापक कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग भी रखी गई। सेवानिवृत्ति सुरक्षा के संदर्भ में, DUTA ने GPF-कम-पेंशन-कम-ग्रेच्युटी प्रणाली को पुनः लागू करने, ग्रेच्युटी एवं प्रोविडेंट फंड की सीमा बढ़ाने तथा LTC प्रावधानों को अधिक व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता दोहराई। इसके अतिरिक्त, हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) की सीमा में पर्याप्त वृद्धि की मांग की गई, ताकि वर्तमान महंगे आवासीय बाजार में शिक्षकों को वास्तविक राहत मिल सके। संघ ने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ती छात्र संख्या (विशेषकर EWS और NEP 2020 के तहत) के अनुरूप खाली शिक्षकीय पदों को शीघ्र भरा जाए तथा नए पद सृजित किए जाएँ। बेहतर शोध वातावरण के लिए पर्याप्त सार्वजनिक निवेश और आधारभूत संरचना सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।DUTA ने स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षकों के वेतन को विश्वविद्यालयों की आंतरिक आय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए पूर्ण केंद्रीय वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही, लाइब्रेरियन एवं अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए समानता आधारित सेवा शर्तों की भी मांग की गई। इस प्रतिनिधिमंडल में DUTA के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी, उपाध्यक्ष प्रो. भूपेंद्र सिंह, सचिव प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर, संयुक्त सचिव प्रो. संजय कुमार तथा कोषाध्यक्ष डॉ. आकांक्षा खुराना शामिल थे।