महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर ठोस कदम

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अशोक कुमार मिश्र
नारी शक्ति बंधन अधिनियम संशोधन विधेयक को लेकर भले ही देश में माहौल गर्म हो, पर उत्तर प्रदेश की महिलाएं इस बात को लेकर खुश है कि यूपी सरकार के सहयोग से वह लगातार तरक्की कर रही हैं तथा महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर यहां लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। वन स्टॉप सेंटर योजना को उत्तर प्रदेश में महिला कल्याण निदेशालय के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इस योजना के जरिए हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर लगभग सभी तरह की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उन्हें भटकना न पड़े और समय पर न्याय मिल सके। इस समय 75 जिलों में 122 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इनमें महिलाओं को लगातार सहायता प्रदान की जा रही है। इन केंद्रों पर आने वाली हिंसा से पीड़ित महिलाओं को पांच प्रकार की सेवाएं जैसे चिकित्सीय सहायता, कानूनी मदद, पुलिस सहयोग, अस्थाई आवास और परामर्श एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती हैं। खास बात यह है कि पुलिस सहायता के तहत एसओ स्तर के अधिकारियों से सीधा समन्वय स्थापित किया जाता है, जिससे जरूरत पड़ने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसके साथ ही पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के इम्पैनल्ड अधिवक्ताओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है। महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 181 महिला हेल्पलाइन भी अहम भूमिका निभा रही है। इस हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को तुरंत संबंधित वन स्टॉप सेंटर को ट्रांसफर कर दिया जाता है। हर सेंटर के डैशबोर्ड पर तैनात महिला कर्मचारी पीड़िता से संपर्क कर उसकी समस्या सुनती है और आवश्यक मदद सुनिश्चित करती है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 4, लखीमपुर खीरी में 3, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर समेत अन्य बड़े जिलों में एक से अधिक वन स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक सेवाएं पहुंचाई जा सकें। सभी सेंटर 24 घंटे सक्रिय रहते हैं और तीन शिफ्ट में महिला कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिससे किसी भी समय सहायता उपलब्ध हो सके।
उधर, उत्तर प्रदेश में “सोलर दीदी” योजना ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनकर उभर रही है। इस पहल के माध्यम से गांवों की महिलाओं को सौर ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। योजना के तहत महिलाओं को सोलर लैंप, सोलर पैनल, चार्जिंग यूनिट और अन्य सौर उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें तकनीकी खराबियों को ठीक करने और उपकरणों की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। परिणामस्वरूप, जहां पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब “सोलर दीदी” गांव-गांव में ऊर्जा का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरीं हैं। इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के रूप में देखने को मिल रहा है। कई महिलाएं अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। इसके साथ प्रदेश की महिलाएं अन्य कार्य कर भी आगे बढ़ रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से भदोही जिले की रहने वाली पप्पू देवी ने मशरूम का उत्पादन शुरू किया है। आज उनकी सालाना कमाई 8 से 10 लाख रुपए तक पहुंच गई है। यूपी आज दुग्ध उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है, जहां ग्रामीण महिलाएं प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहीं हैं। 31 जिलों में महिलाओं ने पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया है और छह हजार से अधिक गांवों में इस मॉडल ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। यूपी के तराई इलाके की यह श्वेतक्रांति केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी सशक्त उदाहरण है। महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने की दिशा में यूपी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत प्रदेश में महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज तैयार की जा रही है, जिससे बालिकाओं और महिलाओं को विद्यालय, कार्यस्थल और अन्य जरूरी स्थानों तक सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक परिवहन मिल सकेगा। इस योजना के तहत शुरुआत में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में इस सुविधा की शुरुआत कर दी गई है, जबकि लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में इसे जल्द शुरू किया जाएगा। पांच जनपदों में 119 महिलाओं को ई-रिक्शा देकर उद्यमी बनाया जा चुका है। वहीं, 629 महिलाओं को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है और 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। इस पहल से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ वाहन ही नहीं चला रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक धुरी भी बन रहीं हैं।read more:https://pahaltoday.com/sensational-revelation-of-murder-in-land-dispute-accused-arrested-within-24-hours/
यूपी की महिलाएं सिर्फ व्यवसाय ही नहीं नौकरी आदि क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई योजनाएं चला रही हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत लखनऊ अलीगंज स्थित आदर्श पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र से तैयारी कर रही 8 महिला अभ्यर्थियों ने यूपी लोक सेवा आयोग परीक्षा में सफलता हासिल की है। जिन्हें डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट कमिश्नर और नायब तहसीलदार के पद पर चयनित किया गया है। शिव की नगरी काशी की पुलिस लाइन में 491 महिला आरक्षी प्रशिक्षण ले रही हैं। मिशन शक्ति, पिंक बूथ और हेल्पलाइन नंबर 1090 जैसी सुविधाओं के साथ अब ये प्रशिक्षु महिला कांस्टेबल ट्रेनिंग पूरा करने के बाद सुरक्षा का जिम्मा उठाएंगी।

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