डॉ भीम राव अम्बेडकर अंबेडकर कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन

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नई दिल्ली, 26 अप्रैल। दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय में समाजिक विज्ञान शोध में पुनर्कल्पना : बहुविषयक परिप्रेक्ष्य विषय पर स्नातक चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों में जटिल सामाजिक मुद्दों की संपूर्ण समझ विकसित करना और वास्तविक दुनियां की समस्याओं को प्रभावी तरीके से समझने में मदद करना रहा। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. बिष्णु मोहन दाश ने कहा कि शोध से समाज और राष्ट्र का विकास के रास्ते खुलते हैं। शोध के समय शोधार्थी को शोध की मौलिकता, शोध की वैज्ञानिकता और शोध की गुणवत्ता का खास ख्याल रखना चाहिए। शोध के विषयों के चयन के समय शोधार्थी को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि शोध देश में नीतियों के निर्माण के आधार बनते हैं और विकास की दिशा तय करते हैं।read more:https://worldtrustednews.in/india-will-definitely-become-a-world-leader-no-one-should-have-any-doubt-about-it-bhagwat/राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा के शोधार्थी और विद्वान गणपति तेती ने कहा कि जिनको सीखने की इच्छा है, वे यहाँ उपस्थित हैं। शोध में युवाओं की जिज्ञासा विषय पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि रिसर्च शब्द की उत्पति ऋषि शब्द से हुई है। भारत ज्ञान का भंडार है। जिज्ञासा के बिना शोध संभव नहीं हो सकता। शोध के बिना शुद्धता नहीं है। शोध में प्रतिबद्धता का होना जरूरी है। उन्होंने शोध में उद्देश्य, प्रविधि, ,परिणाम और टूल पर विस्तार से चर्चा किया। शोध सिर्फ उपाधि के लिए नहीं होना चाहिए, कल्याण के लिए होना चाहिए। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. बिष्णु मोहन दाश ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के चतुर्थ वर्ष के सभी संकायों के स्नातक के शोधार्थियों से शोध पत्र 20 अप्रैल, 2026 तक आमंत्रित किये गये थे, जिसकी प्रस्तुति महाविद्यालय परिसर में शोध के विशेषज्ञ शिक्षकों के समक्ष की गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के कई पाठ्यक्रमों के शोधार्थियों के शोध पत्र प्राप्त हुए जिसमें मनोविज्ञान, भूगोल, समाज विज्ञान, पुस्तकालय विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, हिन्दी पत्रकारिता एवं जनसंचार और अंग्रेजी प्रमुख रहे। सभी संकाय के श्रेष्ठ शोध के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया। पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय में श्रेष्ठ शोध के लिए महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय के शुभांगी शर्मा और करुणा नयन चतुर्वेदी को संयुक्त रूप से पुरस्कार दिया। साथ ही, हरेक संकाय से एक श्रेष्ठ शोध के लिए शोधार्थियों को पुरस्कृत किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोधार्थियों को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में शहीद भगत सिंह कॉलेज के प्रो. चंद्रशेखर दुबे ने भारतीय वेदों के हवाले से मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च के महत्व को विस्तार से बताया। प्रो. दुबे ने शोध पर बात करते हुए कहा कि वैदिक गायत्री मंत्र में मनोविज्ञान, संस्कृति इत्यादि का समावेश है। उन्होंने शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के अन्तरसम्बंधों पर विस्तार से चर्चा किया। संगोष्ठी के आयोजक प्रो. बिष्णु मोहन दाश को अकादमिक योद्धा बताते हुए सफल आयोजन की सराहना की।read more:https://worldtrustednews.in/opposition-mps-served-notice-to-remove-gyanesh-kumar-from-his-post/बतौर विशिष्ट अतिथि इग्नू के प्रो. नारायण प्रसाद ने मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च विषय की व्यापकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रिसर्च के ऑब्जेक्टिव व अन्य विषयों पर विस्तार से विद्यार्थियों को बताया। कहा कि रिसर्च एक व्यापक विषय है। रिसर्च की शुरुआत शंका से होती है। अधिकतर अध्यापक रिसर्च को लेकर एक खास क्षेत्र में ही अपने को सीमित रखते हैं, यह ठीक नहीं है। रिसर्च में डेटा कलेक्शन व एनालिसिस महत्वपूर्ण है। हिन्दी पत्रकारिता विभाग की प्रो. शशि रानी ने समापन सत्र को संबोधित किया। दिल्ली विश्वविद्यालय अनुसंधान परिषद् की संयुक्त अधिष्ठाता डॉ स्वस्ति अल्पना ने सर्वश्रेष्ठ शोधार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर 350 शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र की प्रस्तुति की गयी। शोध के विषय की युक्तिसंगतता, शोध सामग्री की गुणवता और शोध के वैज्ञानिक तरीके में प्रयोग में उत्कृष्टता के आधार पर सभी संकायों के शोधार्थियों में एक सर्वश्रेष्ठ शोधार्थी का चयन किया गया और उसे मुख्य अतिथि के द्वारा पुरस्कृत किया गया। संगोष्ठी में महाराज अग्रसेन कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज, हंसराज कॉलेज, दौलतराम कॉलेज, खालसा कॉलेज, मिरांडा हाउस, किरोड़ीमल कॉलेज, रामजस कॉलेज आदि लगभग 30 से अधिक कॉलेजों के विद्यार्थी ने भाग लिया। इस अवसर पर शोध एब्सट्रेक्ट का लोकार्पण किया गया जिसका संकलन व संपादन डॉ कुमार सत्यम व डॉ तारा शंकर ने किया था। प्रो. सरला भारद्वाज ने उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन किया। सभी अतिथियों के द्वारा दिए गए व्याख्यान की सराहना की। आयोजन का संचालन प्रो. दीपाली जैन ने किया। इस मौके पर अलग अलग विभागों में शोध पत्र पढ़े गए जिसकी अध्यक्षता प्रो शाशि रानी, प्रो. राजेश उपाध्याय, प्रो संजय शर्मा, डॉ मीनू वर्मा, डॉ नरेंद्र बिश्नोई, डॉ ललित कुमार, प्रो तृष्णा सरकार, प्रो राजबाला, प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी, प्रो. मोनिका अहलावत, प्रो. अतुल प्रताप सिंह, प्रो. सुनीता मलिक, प्रो. सुमनजीत , प्रो. मालिनी प्रिया, डॉ मीनू वर्मा, डॉ संजय शर्मा, डॉ ललित कुमार, डॉ मीतू दाश, डॉ विदिशा, डॉ नेहा शर्मा, डॉ अनिल कुमार, डॉ अरुण प्रताप सिंह, डॉ राजेश वत्स, डॉ विनीत कुमार, डॉ रंजीत कुमार, डॉ कुमार सत्यम के साथ अन्य अध्यापक व सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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