नई दिल्ली, 25 अप्रैल। दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय में समाजिक विज्ञान शोध में पुनर्कल्पना : बहुविषयक परिप्रेक्ष्य विषय पर स्नातक चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों में जटिल सामाजिक मुद्दों की संपूर्ण समझ विकसित और वास्तविक दुनियां की समस्याओं को प्रभावी तरीके से समझने में मदद करना रहा। राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्याल देश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को अपनाया गया है। इसके तहत सभी संकायों में स्नातक पाठ्यक्रम में चतुर्थ वर्ष शोध के लिए समर्पित है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि शोध और अनुसंधान किसी भी देश के विकास के रास्ते करते हैं। विकसित भारत 2047 में दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का अहम योगदान होगा, ऐसा मेरा ख्याल है।read more:https://pahaltoday.com/the-government-is-considering-increasing-the-pension-limit-to-rs-10000-per-month/
दिल्ली विश्वविद्यालय के चतुर्थ वर्ष के सभी संकायों के स्नातक के शोधार्थियों से शोध पत्र 20 अप्रैल, 2026 तक आमंत्रित किये गये थे, जिसकी प्रस्तुति महाविद्यालय परिसर में शोध के विशेषज्ञ शिक्षकों के समक्ष की गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के कई पाठ्यक्रमों के शोधार्थियों के शोध पत्र प्राप्त हुए जिसमें मनोविज्ञान, भूगोल, समाज विज्ञान, पुस्तकालय विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, हिन्दी पत्रकारिता एवं जनसंचार और अंग्रेजी प्रमुख रहे। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबद्ध शोधार्थी सह मुख्य अतिथि गणपति टेटे ने कहा कि जिनको सीखने की इच्छा है, वे यहाँ उपस्थित हैं। शोध में युवाओं की जिज्ञासा विषय पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि रिसर्च शब्द की उत्पति ऋषि शब्द से हुई है। भारत ज्ञान का भंडार है। जिज्ञासा के बिना शोध संभव नहीं हो सकता। शोध के बिना शुद्धता नहीं है। शोध में प्रतिबद्धता का होना जरूरी है। उन्होंने शोध में उद्देश्य, प्रविधि, परिणाम और टूल पर विस्तार से चर्चा किया। शोध सिर्फ उपाधि के लिए नहीं होना चाहिए, कल्याण के लिए होना चाहिए। राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोधार्थियों को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में शहीद भगत सिंह कॉलेज के प्रो. चंद्रशेखर दुबे ने भारतीय वेदों के हवाले से मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च के महत्व को विस्तार से बताया। प्रो. दुबे ने शोध पर बात करते हुए वैदिक गायत्री मंत्र में मनोविज्ञान, संस्कृति इत्यादि का समावेश बताया। उन्होंने शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के अन्तरसम्बंधों पर विस्तार से चर्चा किया। बतौर विशिष्ट अतिथि इग्नू के प्रो. नारायण प्रसाद ने मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च विषय की व्यापकता पर विस्तार से चर्चा किया। उन्होंने रिसर्च के ऑब्जेक्टिव व अन्य विषयों पर विस्तार से विद्यार्थियों को बताया। कहा कि रिसर्च एक व्यापक विषय है। रिसर्च की शुरुआत शंका से होती है। अधिकतर अध्यापक रिसर्च को लेकर एक खास क्षेत्र में ही अपने को सीमित रखते हैं, यह ठीक नहीं है। रिसर्च में डेटा कलेक्शन व एनालिसिस महत्वपूर्ण है। समापन सत्र को संबोधित करते हुए महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष प्रो. रणजित् बेहेरा ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह आधुनिक शोध पद्धति से काफी भिन्न है क्योंकि वैदिक परंपरा में ज्ञान मुख्य श्रोत है। दिल्ली विश्वविद्यालय अनुसंधान परिषद् की संयुक्त अधिष्ठाता डॉ स्वस्ति अल्पना ने सर्वश्रेष्ठ शोधार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।संगोष्ठी के संयोजक प्रो. विष्णु मोहन ने विषय प्रवेश कराते हुए शोध के महत्व को विस्तार से बताया। इस अवसर पर शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र की प्रस्तुति, शोध के विषय की युक्तिसंगतता, शोध सामग्री की गुणवता और शोध के वैज्ञानिक तरीके में प्रयोग में उत्कृष्टता के आधार पर सभी संकायों के शोधार्थियों में एक सर्वश्रेष्ठ शोधार्थी का चयन किया गया और उसे मुख्य अतिथि के द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर शोध एब्सट्रेक्ट का लोकार्पण किया गया जिसका संकलन व संपादक डॉ तारा शंकर व डॉ कुमार सत्यम ने किया था। प्रो. सरला भारद्वाज ने उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन किया। सभी अतिथियों के द्वारा दिए गए व्याख्यान की सराहना की। समापन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी पत्रकारिता विभाग की प्रो. शशि रानी द्वारा किया गया। आयोजन का संचालन प्रो. दीपाली जैन ने किया। इस मौके पर प्रो. राजेश उपाध्याय, प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी, प्रो. मोनिका अहलावत, प्रो. अतुल प्रताप सिंह, प्रो. सुनीता मलिक, प्रो. सुमनजीत , प्रो. मालिनी प्रिया, डॉ मीनू वर्मा, डॉ संजय शर्मा, डॉ ललित कुमार, डॉ विनोद कुमार, डॉ विदिशा, डॉ नेहा शर्मा, डॉ अनिल कुमार, डॉ अरुण प्रताप सिंह, डॉ राजेश वत्स, प्रख्यात मीडिया विशेषज्ञ डॉ विनीत कुमार, डॉ रंजीत कुमार, डॉ राकेश कुमार पाण्डेय,डॉ कुमार सत्यम के साथ अन्य अध्यापक उपस्थित रहे।