लाडली बहन योजना: अपात्र महिलाओं से 11 करोड़ की वसूली, 23 करोड़ हड़पने वाले पुरुषों पर कार्रवाई कब ?

Share

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी लाडली बहन योजना योजना को लेकर एक तरफ जहां प्रशासन लगातार संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक, योजना का गलत लाभ उठाने वाली महिलाओं से अब तक 11 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। दरअसल, दिसंबर 2025 में ई-केवाईसी और आवेदन सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि कुल 12,915 महिलाएं इस योजना के लिए अपात्र थीं। इनमें से 6,457 महिलाओं से अब तक करीब 11 करोड़ रुपये वापस वसूले जा चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 2,652 सरकारी महिला कर्मचारियों ने भी अपात्र होने के बावजूद इस योजना का लाभ लिया। इन कर्मचारियों द्वारा करीब 3 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि हड़पने की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने इस पर सख्ती दिखाते हुए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन से यह राशि किस्तों में वसूलनी शुरू कर दी है। साथ ही, दंड स्वरूप उनकी एक वेतनवृद्धि रोकने का भी निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है।read more:https://khabarentertainment.in/a-golden-era-for-fishermen-in-himachal-a-guaranteed-%e2%82%b9100-msp-and-a-deluge-of-subsidies-will-improve-livelihoods/ योजना में घुसपैठ कर करोड़ों रुपये हड़पने वाले पुरुष लाभार्थियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जानकारी के अनुसार, पुरुष लाभार्थियों द्वारा लगभग 23 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया है, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई स्पष्ट कदम सामने नहीं आया है। योजना मूल रूप से जरूरतमंद महिलाओं के लिए बनाई गई थी, लेकिन उसमें पुरुषों की घुसपैठ ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब मांग उठ रही है कि सरकार पहले उन पुरुषों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। फिलहाल, अपात्र महिलाओं से वसूली तो जारी है, लेकिन क्या पुरुष लाभार्थियों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाई जाएगी यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *