बिहार में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने बनाया है अपना सीएम, अब संगठन-सरकार में करेगी बदलाव

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मंत्रियों में 30फीसदी बदल सकते हैं चेहरे, कई की हो सकती है छुट्टी

नई दिल्ली। बिहार में पहली बार अपना सीएम बनाने के बाद अब बीजेपी संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े बदलाव करने की तैयारी चल रही है। मई के पहले से दूसरे सप्ताह में सरकार और संगठन दोनों में नई घोषणाएं हो सकती हैं। सीएम सम्राट चौधरी अपनी पहली कैबिनेट का विस्तार करेंगे। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी पांच महीने बाद संगठन विस्तार कर सकते हैं।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के बारे में बोला जाता है कि वो कभी भी किसी एक नेता को पावरफुल नहीं बनाती है। पार्टी एक साथ कई लीडरशिप तैयार करती है। बिहार में बीजेपी के शुरुआती समय को देखें तो कैलाशपति मिश्र को राज्य में बीजेपी का भिष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने 1980 से 1995 तक पार्टी को घर-घर तक पहुंचाया। उन्हें गंगा प्रसाद चौरसिया और सीपी ठाकुर समेत अलग-अलग नेताओं का सपोर्ट मिला। साल 2000 के बाद पार्टी राज्य में नए नेता को लेकर आई जो थे सुशील कुमार मोदी। उनके नेतृत्व में पार्टी सरकार का हिस्सा बनी। इनके साथ अश्विनी कुमार चौबे और प्रेम कुमार जैसे नेताओं को भी पार्टी ने आगे बढ़ाया। अब जब बिहार में बीजेपी सत्ता के शिखर पर है तो तीन युवा नेताओं के हाथ में पार्टी के विस्तार की कमान दे दी है। नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। सम्राट चौधरी सीएम और संजय सरावगी प्रदेश अध्यक्ष हैं। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद बिहार कैबिनेट में विस्तार होगा। सूत्रों की मानें तो बीजेपी कोटे के मंत्रियों में 30फीसदी चेहरे बदल सकते हैं। पार्टी की तरफ से नवंबर में सरकार गठन के दौरान नए चेहरे को मौका दे दिया गया था। बीजेपी के मौजूदा मंत्रियों की सूची में 3-4 चेहरे को बदलकर नए चेहरे को मौका मिल सकता है।read more:https://pahaltoday.com/man-dies-in-road-accident-in-barhalganj/

:इसमें सम्राट चौधरी सीएम तो नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं तो उनका कोटा खाली है। इनके अलावा दो-तीन नॉन परफॉर्मिंग नेताओं को रिप्लेस किया जा सकता है। अगर बीजेपी कोटे के मौजूदा मंत्रियों की सूची देखें तो इनकी औसत आयु 53 साल है। लखेंद्र पासवान, श्रेयसी सिंह, संजय टाइगर और रमा निषाद जैसी युवा और नए चेहरे को पार्टी पहले ही कैबिनेट में शामिल कर चुकी हैं। बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। प्रदेश अध्यक्ष के बाद सबसे अहम पद महामंत्री का होता है। अभी चार महामंत्री राधामोहन शर्मा, राजेश वर्मा, लाजवंती झा और शिवेश कुमार हैं। शिवेश राज्यसभा सदस्य बने हैं। पार्टी इन्हें बदलने की तैयारी में है। इनकी जगह पूरी तरह नए चेहरे को मौका मिल सकता है। प्रदेश उपाध्यक्ष पद से भी 6-7 पुराने चेहरों की छुट्‌टी होना तय है। इनमें राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता और विधायक संजय गुप्ता जैसे नाम शामिल हैं। वहीं, 2-3 उपाध्यक्ष को प्रमोशन मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो नए संगठन विस्तार में तीन बातों का ध्यान रखा जाएगा युवा, महिला और फील्ड में सक्रिय। इसके साथ ही पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी संगठन में भी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल बीजेपी के प्रदेश कार्यसमिति में 35 लोगों की टीम है। इनमें 15 सवर्ण, 9 ईबीसी, 7 ओबीसी और 4 दलित हैं।

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