महिला आरक्षण विधेयक पर सियासत तेज, कांग्रेस ने कहा- सरकार डैमेज कंट्रोल में लगी

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नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच कांग्रेस ने सरकार द्वारा जारी किए गए ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ (फेक) पर तीखा हमला बोला है और इसे “डैमेज कंट्रोल” की कोशिश करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने यह फेक विधेयक पेश करने से पहले जारी नहीं किया, बल्कि संसद में असफलता मिलने के बाद इसे सामने लाया गया, जिससे उसकी मंशा पर सवाल उठते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बयान जारी करते हुए कहा कि 17 अप्रैल की रात लोकसभा में मिली “शर्मनाक हार” के बाद सरकार अब अपनी छवि बचाने में जुटी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा जारी फेक “तथ्यात्मक रूप से गलत” और “भ्रामक” जानकारी से भरा हुआ है। जयराम रमेश ने विशेष रूप से परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उनका कहना था कि फेक में उन महत्वपूर्ण सवालों का कोई जवाब नहीं दिया गया है, जो संसद में विपक्ष ने उठाए थे। गौरतलब है कि सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के माध्यम से 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रावधान भी इसमें शामिल था। हालांकि, यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि फेक में यह दावा किया गया है कि आरक्षण लागू करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जरूरी है, जो पूरी तरह “फर्जी” और “भ्रामक” है। विपक्ष लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि सरकार महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन लागू करने की कोशिश कर रही है, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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