सत्संग से जागृत होता है आत्मकल्याण का मार्ग, संत शरण ही सच्ची मुक्ति का द्वार — स्वामी जय गुरुबंदे जी

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जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के तत्वाधान में जय गुरुबंदे आश्रम, गाजीपुर का स्थापना दिवस 18 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 तक भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया जा रहा है। इस तीन दिवसीय आयोजन में दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेकर सत्संग, भजन और ध्यान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।मीडिया प्रभारी शशिदास द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्थापना दिवस के दूसरे दिन प्रातःकालीन बेला में परम संत स्वामी जय गुरुबंदे जी महाराज ने अपने प्रवचन में मानव जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक जीवात्मा जब माता के गर्भ में होती है, तब वह ईश्वर से भक्ति, भजन, सेवा और सत्संग करने का संकल्प लेकर इस संसार में आती है। लेकिन जन्म लेने के बाद माया-मोह और सांसारिक आकर्षणों में फंसकर वह अपने उस मूल वचन को भूल जाती है।उन्होंने कहा कि संतों और फकीरों से दूरी ही मनुष्य के भटकाव का प्रमुख कारण है, जिसके चलते वह जन्म-मरण के चक्र में फंसकर चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करता रहता है। मनुष्य जीवन मिलने के बाद भी वह मंदिर, मस्जिद और तीर्थ स्थलों पर जाकर पूजा-पाठ, स्नान, हवन और यज्ञ तो करता है, लेकिन सच्चे भजन और आत्मसाधना की ओर ध्यान नहीं देता।स्वामी जी ने आगे बताया कि जब कोई साधक सच्चे संत महापुरुष की शरण में पहुंचता है और सत्संग का श्रवण करता है, तब उसे अपने मूल वचन का स्मरण होता है। इसके बाद वह सत्गुरु से प्रार्थना, विनती और आत्मिक फरियाद करता है, जिसे परमात्मा स्वीकार करते हैं। इस अवस्था में साधक को अपने हृदय में ईश्वर के दर्शन और आंतरिक संवाद का अनुभव होता है, जो आत्मकल्याण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने यह भी कहा कि सच्चा संत ही जीव को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है और उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। संतों की कृपा के बिना आत्मज्ञान और परम सत्य की प्राप्ति संभव नहीं है।इस अवसर पर आश्रम में विभिन्न भजन-कीर्तन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर होकर भाग ले रहे हैं। ध्यान साधना के माध्यम से लोगों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव भी कराया जा रहा है।ज्ञात हो कि जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में अनेक आश्रम संचालित हो रहे हैं, जहां नियमित रूप से सत्संग, ध्यान और भजन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संस्था द्वारा समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार और मानवता के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।कार्यक्रम के समापन तक विभिन्न क्षेत्रों से और अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिससे यह आयोजन और भी व्यापक स्वरूप लेता जा रहा है।

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