स्योहारा/बिजनौर। एक ओर वैश्विक युद्ध की स्थितियों के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने की बातें कही जा रही हैं, वहीं स्योहारा नगर में रसोई गैस वितरण प्रणाली के दोहरे मापदंडों ने उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है। स्योहारा नगर पालिका के जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी (DM) बिजनौर को पत्र भेजकर गैस आपूर्ति में हो रहे भेदभाव और कालाबाजारी की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है मानकों का खेल: स्योहारा के साथ सौतेला व्यवहार? जिलाधिकारी को भेजे गए शिकायती पत्र में नागरिकों ने बताया कि नियमानुसार नगर क्षेत्रों के लिए गैस रीफिल का समय 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन निर्धारित है। विडंबना यह है कि जनपद की अन्य नगर पालिकाओं जैसे धामपुर, किरतपुर और चांदपुर में 25 दिन का मानक लागू है, लेकिन स्योहारा नगर पालिका क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ आज भी 45 दिन का ‘ग्रामीण मानक’ थोपा जा रहा है। उपभोक्ताओं का सवाल है कि आखिर एक ही जनपद की अलग-अलग नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग नियम क्यों? बुकिंग के बाद भी ‘डीएसी’ का इंतजार उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सिलेंडर बुक करने के बाद मोबाइल पर ‘4 घंटे में आपूर्ति’ का मैसेज तो आ जाता है, लेकिन डिलीवरी के लिए जरूरी डीएसी (DAC) नंबर दिनों तक नहीं आता। आपूर्ति का अभाव धरातल पर कम और प्रबंधन की खामियों में ज्यादा नजर आ रहा है, जिससे आम उपभोक्ता त्रस्त है। कालाबाजारी का बोलबाला है। ₹150 प्रति किलो बिक रही गैस। एक ओर जहाँ वैध कनेक्शन धारक सिलेंडर के लिए हफ़्तों इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर में गैस की कालाबाजारी चरम पर है। शिकायत के अनुसार, खुदरा विक्रेता अनैतिक रूप से 150 रुपये प्रति किलो की दर से गैस बेच रहे हैं। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में गैस ब्लैक में उपलब्ध होना संभव नहीं है।read more:https://khabarentertainment.in/14-prominent-social-workers-were-honored-on-baba-sahebs-birth-anniversary/
प्रशासन से न्याय की गुहार
स्योहारा नगर पालिका वासियों ने जिलाधिकारी और जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) से मांग की है कि:
स्योहारा नगर के लिए गैस रीफिल का समय अन्य नगर पालिकाओं की भांति 25 दिन किया जाए। गैस की कालाबाजारी करने वाले खुदरा विक्रेताओं पर छापेमारी कर सख्त कार्रवाई की जाए। बुकिंग और डीएसी नंबर की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
यदि नगर पालिका क्षेत्र में भी उपभोक्ताओं को ग्रामीण मानकों पर गैस मिलेगी, तो ‘शहरी विकास’ के दावों का क्या अर्थ रह जाएगा? प्रशासन को इस ‘अदृश्य संकट’ का तत्काल समाधान निकालना चाहिए।