रजत श्रीवास्तव
गाजीपुर । राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर शनिवार को जिला कारागार गाजीपुर का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अर्चना ने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।निरीक्षण के साथ ही “अंडर ट्रायल बंदियों की समस्याओं के निस्तारण” विषय पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में बंदियों को निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा, जेल अपील की प्रक्रिया और अन्य कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर बंदी को न्याय पाने का समान अधिकार है और विधिक सेवा प्राधिकरण इसके लिए प्रतिबद्ध है।कारागार प्रशासन के अनुसार वर्तमान में जेल में कुल 518 बंदी निरुद्ध हैं, जिनमें 452 पुरुष, 24 महिलाएं और 42 अल्पवयस्क शामिल हैं। बंदियों को निर्धारित मेन्यू के तहत सुबह चना और चाय, दोपहर में रोटी, चावल, अरहर की दाल व सब्जी तथा शाम को रोटी, चावल, चना दाल और हरी सब्जी उपलब्ध कराई जा रही है।
निरीक्षण के दौरान बीमार बंदियों के उपचार को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। कारापाल और चिकित्सक को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा गया कि किसी भी बंदी के इलाज में लापरवाही न हो। साथ ही जेल में संचालित लीगल क्लीनिक को और अधिक सक्रिय करने पर जोर दिया गया, ताकि बंदियों को समयबद्ध और प्रभावी विधिक सहायता मिल सके।
इसके अलावा कारागार परिसर की साफ-सफाई, स्वच्छता व्यवस्था और मच्छरों से बचाव के लिए नियमित छिड़काव सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए। निरीक्षण के दौरान कारापाल सहित लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य रतनजी श्रीवास्तव, भानू प्रताप सिंह और दीपक राय मौजूद रहे।