सरेंडर होे चुकी साइडों से बेखौफ निकाली जा रही बालू, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

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सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत सोन नदी में सारे नियम-कानूनों को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार बालू खनन के आवंटित खनन पट्टा के आड़ में बड़े पैमाने पर रेत के अवैध खनन का कारोबार रूकने का नाम नहीं ले रहा है। जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनन व परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल कर गठित की गई टास्क फोर्स के बावजूद बालू के अवैध खनन का काला कारोबार चरम पर चल रहा है। आलम यह है कि सरेंडर (बंद) हो चुकीं बालू साइडों से भी प्रतिबंधित मशीनों के जरिए बालू की निकासी बेखौफ करायी जा रही है।ओबरा तहसील के ग्राम बरहमोरी स्थित सोन नदी में आवंटित खनन पट्टा के आड़ में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित मशीनों के जरिए बालू की निकासी कराए जाने का आरोप लगाते हुए गुरूवार को क्षेत्रीय लोगों ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता दीपू शर्मा ने आरोप लगाते बताया कि ग्राम बरहमोरी स्थित सोन नदी से नियमानुसार बालू खनन के लिए चार अलग-अलग फर्मो को लीज आवंटित किया गया था, जिनमें से तीन साइडें सरेंडर (बंद) हो चुकी हैै। बावजूद इसके खनन पट्टा धारक खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से बंद हो चुकी साइड़ों से भी बेखौफ होकर प्रतिबंधित मशीनों के जरिए बालू की निकासी करा रहे हैं। यहीं नहीं वर्तमान में एनडी फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित बालू साइड के आड़ में लीज एरिया से हट कर बालू की निकासी करायी जा रही है। कहा कि अधिकारियों के संरक्षण में चल रहे इस काले कारोबार से प्रदेश सरकार के राजस्व की प्रतिदिन भारी क्षति हो रही है। मशीनों के जरिए बालू की निकासी कराए जाने से सोन नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा है। वहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन माफिया द्वारा नदी की धारा को मोड़कर बालू निकाली करायी जा रही है और भारी मशीनों के जरिए रात के अंधेरे में अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। इससे कैमूर क्षेत्र के वन्यजीवों और जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों ने कहा कि बड़े स्तर पर हो रहे अवैध खनन पर कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि गरीब ग्रामीण यदि अपने घर के लिए थोड़ी बालू ले जाते हैं तो उन पर सख्ती दिखाई जाती है। इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताते हुए उन्होंने इसे तुरंत समाप्त करने की मांग की। ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखते हुए ग्रामीणों ने सोन नदी की प्राकृतिक धारा के साथ छेड़छाड़ पर रोक लगाने, नाव लिफ्टर मशीनों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने, रात्रिकालीन खनन पर सख्त कार्रवाई करने और ओवरलोडिंग पर पूर्ण नियंत्रण की मांग किया। चेतावनी दी कि खनन पट्टा के आड़ में अवैध खनन व परिवहन के काले कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आंदोलन किया जाएगा। मौके पर गुलाब, मोहन आदि मौजूद रहे।

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