सोनभद्र। जिला प्रशासन की सख्त पाबंदियों के बावजूद ओबरा तहसील क्षेत्र के भगवा खंड-2 में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन का गोरखधंधा चरम पर चल रहा है। आरोप है कि खनन पट्टा के आड़ में यहां लीज एरिया से हटकर प्रतिबंधित मशीनों के जरिए दिन-रात (24 घंटे) बेरोक-टोक नदी के गर्भ से बालू की खोदायी करायी जा रही है, बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही स्थानीय थाना पुलिस चल रहे इस काले कारोबार पर अंकुश लगाने में नाकारा साबित हो रही है।स्थानीय लोगों के मुताबिक नदी क्षेत्र में रात के अंधेरे से लेकर दिन तक पोकलेन और बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनों से बालू की खुदाई कराई जा रही है।read more:https://khabarentertainment.in/30-fasts-in-ramadan-are-obligatory-20-in-a-year-are-voluntary-fasting-woman-reshma-bano-explains-the-importance-of-prayer/ नदी के गर्भ से छान कर बालू की निकासी कराने के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक लिफ्टिंग मशीनों को सोन नदी में उतारा गया है। जबकि खनन नियमों के अनुसार ऐसी मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध खनन से न केवल सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि नदी की प्राकृतिक संरचना भी तेजी से बिगड़ रही है। नदी की गहराई और धारा में हो रहे बदलाव से जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। बड़े पैमाने पर खुदाई के कारण मछलियां और अन्य जलीय जीव काल के गाल में समा रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया बेखौफ होकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई करने के बजाय खनिज विभाग के अधिकारी कार्यालयों में बैठकर हालात से अनजान बने हुए हैं, जिससे अवैध खनन को और बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। साथ ही इस तरह की घटनाओं से सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि नदी, पर्यावरण और सरकारी राजस्व की रक्षा हो सके।