मणिपुर में हालिया हिंसा के दौरान सुरक्षा बल की फायरिंग में घायल हुए एक युवक की बुधवार को मौत हो गई. मृतक की पहचान 31 वर्षीय वांगहेंगबम बॉबी के रूप में हुई है. वह बिष्णुपुर जिले के कुंबी तेराखोंग माखा लीकाई का रहने वाला था. इस मौत के बाद फायरिंग में मरने वालों की संख्या तीन हो गई है. इससे पहले मंगलवार को दो लोगों की जान गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस अस्थिर सामाजिक डांचे का प्रतीक है, जो पिछले कई महीनों से भीतर ही भीतर सुलग रहा था।इस दर्दनाक घटना ने न केवल स्थानीय लोगों के मन में भय और आक्रोश पैदा किया है, बल्कि पूरे देश के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर में में शांति कब और कैसे लौटेगी।इस प्रदेश में स्थायी शांति का इंतजार काफी लंबा होता जा रहा है। रात के सन्नाटे में एक घर पर रॉकेट हमला होना, जिसमें एक पांच महीने की बच्ची और एक पांच साल के बच्चे की जान चली जाती है, यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक और अस्वीकार्य है। यह आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि उन परिवारों की टूटती दुनिया की कहानी है, जिनके लिए जीवन अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा। बिष्णुपुर जिले में इस घटना के बाद जो प्रतिक्रिया देखने को मिली, वह इस बात का संकेत है कि जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।सड़कों पर उत्तरी भौड़, कर्फ्यू का लागू होना, पांच जिलों में इंटरनेट सेवाओं का बंद होना और सुरक्षा बलों की बढ़ती तैनाती ये सभी हालात की गंभीरता को दर्शाते हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसक प्रतिक्रिया और जवाब में हुई फायरिंग, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई, यह बताता है। है कि हालात कितने नाजुक और विस्फोटक हो चुके हैं। मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा का यह नया अध्याय है, जिसकी जड़ें कहीं गहरी हैं। मैतेई और कुकी जो समुदायों के बीच बढ़ती दूरी और अविश्वास ने इस संघर्ष को लगातार हवा दी है। 27 मार्च 2023 को हाई कोर्ट के उस निर्देश के बाद, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने पर विचार करने की बात कही गई थी, स्थिति और भी संवेदनशील हो गई। कुकी और अन्य आदिवासी समुदायों को यह डर सताने लगा कि उनके अधिकारों और संसाधनों पर असर पड़ेगा। इसके बाद 3 मई 2023 को शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन धीरे–धीरे हिंसा में बदल गया और आज तक यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सरकार ने हालात को काबू में करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती, कर्फ्यू, इंटरनेट सेवाओं का निलंबन, शांति समिति का गठन और राहत शिविरों का संचालन ये सभी प्रयास इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय है। लेकिन इसके बावजूद हिंसा का दौर जारी है। समुदायों के बीच लंबे समय से जारी हिंसा में तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे हैं। ऐसे में