केरोसीन नहीं, बालीवुड स्टाइल में बोलो- घासलेट-टू

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वीरेंद्र बहादुर सिंह 
आज की सासुएं पुराने जमाने में बहू पर केरोसीन छिड़ककर उसे कैसे जलाया जाता था, यह सर्च करेंगी“बॉस, एक नई फिल्म का आइडिया आया है।” बालीवुड के राइटर ने डायरेक्टर के सामने उत्साह से कहा। “बोल, इस बार हमारा एजेंट किस देश में तबाही मचाएगा? बांग्लादेश में या श्रीलंका में?”“बॉस, रहने दो। बांग्लादेश वाले तबाही मचाने के मामले में आत्मनिर्भर हैं और श्रीलंका में चाहे जितनी गड़बड़ी हो, हमारी पब्लिक को ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती।”“तू अब ये मत कहना कि हमारी स्टोरी में एक एजेंट यहां से भागकर बंटवारे के समय पाकिस्तान पहुंच गया था।”“बॉस, पाकिस्तान बहुत घिस चुका है। मेरी स्टोरी तो अभी के ईरान-इजराइल युद्ध पर है।”
“रहने दे बेवकूफ, मेरे प्रोड्यूसर का बजट तो इम्फाल जाकर शूटिंग करने का भी नहीं है। तू ईरान-इजराइल तक लंबा मत खींच।”read more:https://khabarentertainment.in/three-blood-donors-donated-blood-on-behalf-of-jai-ambe-blood-donation-committee-
अरे बॉस, पूरी स्टोरी तो सुनिए। युद्ध ईरान में चल रहा है, लेकिन बवाल तो हमारे यहां है ना। देखिए, सरकार ने फिर से केरोसीन बेचने का आदेश निकाल दिया।”
“अरे मूर्ख, तेरी ऐसी स्टोरी से हमारी फिल्म कंपनी बिना केरोसीन के ही जल जाएगी। बेवकूफ, इस जेन-जी दर्शकों को तो केरोसीन क्या होता है, ये भी पता नहीं होगा।”
“सर, वहीं तो मेरी स्टोरी के टाइटल का आइडिया है। हम अपनी फिल्म का नाम ‘केरोसीन’ नहीं, बल्कि आज की बालीवुड स्टाइल में ‘घासलेट-टू’ रखेंगे। अभी पुरानी हिट फिल्मों के पार्ट-टू, थ्री बनाने का फैशन चल रहा है, उसमें जेन-जी को मजा आएगा।”read more:https://khabarentertainment.in/dg-health-inspects-unnao-district-hospital-patients-express-satisfaction-with-treatment-directs-on-reduction-of-dust-and-fan“भले आदमी, लेकिन ‘घासलेट’ नाम की कोई फिल्म पहले बनी हो, ऐसा तो मुझे याद नहीं।”“लेकिन सर, ऐसा कहां जरूरी है कि ‘घासलेट-टू’ बनाने के लिए ‘घासलेट’ पहले बनी हो। हम फिल्म में फ्लैशबैक में दिखाएंगे कि कैसे आज की जेन-जी की दादियां घासलेट के स्टोव पर खाना बनाती थीं और इस जनरेशन के चाचा कैसे केरोसीन से चलने वाली रिक्शाओं में सफर करते थे। बॉस, स्टोरी में सास-बहू का एंगल भी डालेंगे, जिसमें आज की सासुएं बहू को केरोसीन डालकर जलाने की पुरानी विधि सर्च करती दिखेंगी।”
“ओ डियर, इसमें मसाला कहां है?”read more:https://khabarentertainment.in/a-huge-free-eye-camp-will-be-organised-on-monday-at-gayatri-medical-store-akbarpur-rura-tiraha/“मसाला तो यही है बॉस कि हीरो अपने दादा की बातों से प्रेरित होकर, जो कभी राशन के केरोसीन के काले बाजार का किंग था, खुद भी केरोसीन के काले बाजार में उतरता है। लेकिन हीरोइन उसे समझाती है कि इससे अच्छा गैस का काला बाजार कर, उसमें ज्यादा पैसा है। फिर हीरो परिवार की परंपरा और प्रेमिका की इच्छा के बीच फंस जाता है।”
अचानक डायरेक्टर उठकर अंदर के कमरे में भागा और वहां से एक डिब्बा लेकर आया। राइटर घबरा गया।“ये क्या बॉस, आप अभी से मेरी स्टोरी के नाम का इस्तेमाल करने लगे?”
डायरेक्टर गुस्से में बोला, “नहीं, नहीं… मुझे लग रहा है कि तेरी ऐसी स्टोरी सुनने से अच्छा है कि मैं खुद पर घासलेट डालकर आत्मदाह कर लूं।”डायरेक्टर ने अपने ऊपर घासलेट के छींटे डाल दिए। राइटर नाक दबाकर वहां से भाग गया।read more:https://khabarentertainment.in/the-opposition-has-only-one-agenda-take-votes-and-exploit-chief-minister-nayab-singh-saini/

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