वीरेंद्र बहादुर सिंह
देशभक्ति के साथ-साथ चारों ओर फैले गैस-भक्ति के माहौल में आज सुबह मैंने हमारे पराक्रमी पिरथी काका और हमेशा हड़बड़ाए रहने वाली वबाला काकी को नएनकोर कपड़ों में हाथ में टिफिन लेकर घर से निकलते देखा। मैं भी बिल्ली नहीं, बल्कि बिलौटे की तरह रास्ता काटकर उनके सामने आ गया।मैंने पूछा, “काका, इतना सज-धजकर और हाथ में टिफिन लेकर काकी के साथ कहां जा रहे हो?”
पिरथक काका हंसते हुए बोले, “तेरी काकी तो लिमिटेड कंपनी है। आज हम गीधु के इकलौते बेटे की शादी में जा रहे हैं।”
मुझे आश्चर्य हुआ, मैंने पूछा, “शादी में जाना ठीक है, लेकिन ऐसे टिफिन लेकर क्यों जा रहे हो, जैसे किसी मरीज को खाना देने अस्पताल जा रहे हो?”पिरथी काका गुनगुनामैंने बीच में रोककर पूछा, “सीधी बात बताओ, टिफिन क्यों?” काका बोले, “गीधु ने 200 मेहमान बुलाए थे, लेकिन गैस की किल्लत के कारण कैटरिंग वाला आखिरी समय पर मुकर गया। बोला, इतने लोगों के लिए गैस सिलेंडर नहीं हैं। मजबूरी में गीधु ने व्हाट्सऐप पर मैसेज भेज दिया, ‘शादी में जरूर आइए, लेकिन अपना टिफिन साथ लाना। मिठाई और नमकीन हमारी तरफ से होगा।’ बस, हम भी अपना-अपना टिफिन लेकर जा रहे हैं।”काका-काकी को जाते देख मैं सोचने लगा और गुनगुनाया, “जिया बेकरार है, गैस की तकरार है।”
इसी बीच मोहल्ले के कोने पर गैस सिलेंडर की लंबी लाइन दिखी। एक बोर्ड लगा था, “यहां ऑनलाइन गैस मिलेगी (मतलब जो लाइन में खड़ा रहेगा उसे गैस मिलेगी)।”अगले दिन मुझे भी एक शादी में जाना था। निमंत्रण में लिखा था, “दोपहर 1 बजे भोजन।” लेकिन शादी की रस्में खत्म होने के बाद भी खाने का कोई अतापता नहीं। भूख से हालत खराब थी। मैंने एक जानकार से पूछा, “इतनी देर क्यों?”
वह बोला, “चार सिलेंडर खत्म हो गए, आधी ही रसोई बनी। अब चार और सिलेंडर ब्लैक में मंगवाए जा रहे हैं। इसलिए भोजन-दार से मिलेगा।”मैंने मन में सोचा कि अमेरिका और ईरान लड़ें तो अलग बात, लेकिन यहां तो हमें शादी में भी इंतजार करना पड़ रहा है!
अब तो हालत यह है कि गैस कंट्रोल के साथ-साथ गेस्ट कंट्रोल भी लागू करना पड़ रहा है। पिरथी काका ने रिश्तेदारों को साफ कह दिया, “छुट्टियों में मत आना, गैस नहीं है, नहीं तो हमें ही गालियां सहनी पड़ेंगी।”गैस की कमी के कारण अब लोग चूल्हे, सिगड़ी या कोयले पर रोटी बना रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र के विदर्भ में तो बिना ईंधन और तवे के रोटी बनाने का तरीका देखा गया!मैंने काका को वीडियो दिखाया, महिलाएं सड़क पर रोटी सेक रही थीं और कुछ लोग कार के गर्म बोनट पर।काका हैरान होकर बोले, “इसे रोटी नहीं, रोडली कहना चाहिए।”
मैंने मजाक में कहा, “वहां मुर्गियां अंडा नहीं, सीधे आमलेट देती हैं।”काका ने मुझे डांटते हुए कहा, “इतने बड़े-बड़े झूठ बोलता है, क्या तुझे ‘ट्रम्प’ हो गया है?”मैंने हंसते हुए कहा, “जो भी हो, गैस हो या न हो, खाना तो बनाना ही पड़ेगा।”