बहराइच ( विशेश्वरगंज )।गांवों के विकास के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी संपत्तियां दबंगों की जागीर बनती जा रही हैं। विकासखंड क्षेत्र के बड़ा गांव में बना पंचायत भवन आज खुलेआम कब्जे में है और पूरा प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।यह वही पंचायत भवन है, जिसे ग्रामीणों की बैठकों, योजनाओं के संचालन और सरकारी कार्यों के लिए बनाया गया था। लेकिन आज हालत यह है कि पंचायत का पूरा कामकाज ठप पड़ा है और ग्रामीण खुले आसमान के नीचे भटकने को मजबूर हैं।सबसे बड़ा सवाल — क्या प्रशासन को यह कब्जा दिखाई नहीं दे रहा, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? जबकि मौके राम चंदर बाबा के परिवार का कब्जा है। उनके परिवार जनों का कहना है हमारी निजी जमीन पर पंचायत भवन का निर्माण करवा दिया गया । इस लिए हम इसपर काबिज है। इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो प्रशासन पूरी तरह नाकाम है या फिर दबंगों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
जब खंड विकास अधिकारी से सवाल किया गया तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था — “हमें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।”अब सवाल उठता है कि जब पंचायत का मुख्य भवन ही कब्जे में है, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस दुनिया में रह रहे हैं?खंड विकास अधिकारी (BDO) और ग्राम विकास अधिकारी की निष्क्रियता अब खुलकर सामने आ रही है। क्षेत्र के ग्राम पंचायत जमुनहा कला में हालात और भी शर्मनाक हैं।अमृत महोत्सव के दौरान फहराया गया तिरंगा आज तक पंचायत भवन पर लहरा रहा है। राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन न तो ग्राम प्रधान को परवाह है और न ही अधिकारियों को।एक तरफ सरकार विकास और राष्ट्रभक्ति की बातें करती है, दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर सरकारी भवनों पर कब्जा और तिरंगे का अपमान—यह दोहरी तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।