पिलखुआ वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नई पीढ़ी अपने मूल संस्कारों से दूर होती जा रही है।नगर मैं रेलवे रोड स्थित बाल मुकुंद जी की धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह के दौरान कथा वाचक राजेंद्र प्रसाद पांडे ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में पारिवारिक संबंधों में गहरा प्रेम और आत्मीयता देखने को मिलती है,कथा के दौरान उन्होंने मनु और शतरूपा के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके परिवार में उच्च संस्कार और गुणों की परंपरा थी। राजेंद्र प्रसाद पांडे ने कहा कि वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नई पीढ़ी अपने मूल संस्कारों से दूर होती जा रही है। ऐसे में भागवत कथा जैसे धार्मिक आयोजनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। ये कथाएं न केवल धार्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और संस्कृति के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न करती हैं।उन्होंने कथा के दौरानअभिभावकों से कहां कि वे अपने बच्चों को ऐसे आयोजनों से जोड़ें, ताकि उनमें भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और सकारात्मक सोच विकसित हो सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।