गाजीपुर। श्री गंगा आश्रम में आयोजित 48वें मानवता अभ्युदय महायज्ञ का नवां एवं अंतिम दिवस श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हो गया। महायज्ञ की पूर्णाहुति श्रीरामचरितमानस के पारायण, वैदिक हवन-यज्ञ, संध्याकालीन सत्संग और विशाल भंडारे के साथ सम्पन्न हुई। अंतिम दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आश्रम परिसर में उमड़ पड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।संध्याकालीन सत्संग ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ ईश्वर वंदना से किया गया। इस अवसर पर श्री वीरेंद्र जी एवं श्री सुनील जी द्वारा गुरु अर्चना प्रस्तुत की गई, जबकि श्री चौधरी जी, पांडे जी, बसंती देवी और श्री रजनीश जी ने भजन-कीर्तन के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों की मधुर ध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।व्याख्यानों की श्रृंखला में आश्रम के सर्वराहकार, मानव धर्म प्रसार समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष एवं बाबा गंगारामदास उत्तर माध्यमिक बालिका विद्यालय के प्रबंधक महंत भोला बाबा ने अपने संबोधन में कहा कि श्री गंगा आश्रम सभी वर्गों, जातियों और धर्मों के लोगों के लिए समान रूप से खुला है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे आश्रम की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाएं। उन्होंने मानव जीवन में सत्य, न्याय और धर्म जैसे मूल सिद्धांतों को अपनाने पर विशेष बल दिया।युवा व्यास माधव कृष्ण ने अपने ओजस्वी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी धर्मों और शास्त्रों का मूल उद्देश्य व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाना है। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, शौच, ब्रह्मचर्य, अस्तेय, शांति, शम और दम जैसे सद्गुणों को केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित न रखकर समाज में भी स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक और धार्मिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि जब समाज में इन मूल्यों की कमी होती है, तो उसका दुष्परिणाम पूरे राष्ट्र को भुगतना पड़ता है।उन्होंने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म की स्थापना के लिए अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक है। साथ ही उन्होंने शिवाजी, महाराणा प्रताप, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद और सरदार भगत सिंह जैसे महान वीरों के संघर्षों को याद करते हुए समाज को जागरूक होने का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, विशेषकर दहेज प्रथा के खिलाफ संकल्प लेने का आह्वान करते हुए दहेजमुक्त विवाह की अपील की।कार्यक्रम का संचालन साहब सिंह यादव ने किया। महायज्ञ की पूर्णाहुति भव्य कलश यात्रा, मां गंगा के पूजन एवं प्रातः 10 बजे से प्रारंभ हुए विशाल भंडारे के साथ सम्पन्न हुई। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने अनुशासित ढंग से प्रसाद ग्रहण किया। प्रशासन, पुलिस बल, आश्रम के भक्तों एवं स्वयंसेवकों की सक्रियता और मुस्तैदी के चलते पूरे आयोजन में व्यवस्था सुदृढ़ और सुव्यवस्थित रही।महायज्ञ के समापन पर श्रद्धालुओं ने आश्रम परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया और ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों की निरंतरता की कामना की।