गाजीपुर। कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य राजस्व अधिकारी आयुष चौधरी की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में न्यायालयों में लंबित एवं निस्तारित वादों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा करते हुए अभियोजन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। समीक्षा के दौरान बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 27 वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें 3 मामलों में दोषियों को सजा हुई, जबकि 18 मामलों में अभियुक्त बरी हो गए और 15 मामलों में पक्षद्रोहिता के चलते अभियुक्तों को राहत मिली। अन्य अधिनियमों के अंतर्गत 9 वाद निस्तारित हुए, जिनमें सभी 9 मामलों में अभियुक्तों को सजा सुनाई गई।
बैठक में कुछ प्रमुख मामलों का भी उल्लेख किया गया। थाना भुड़कुड़ा के एक मामले में जनपद न्यायाधीश न्यायालय द्वारा अभियुक्त संदीप कश्यप को 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 8 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इसी प्रकार थाना जमानियाँ के एक मामले में रविन्द्र यादव को 3 वर्ष की सश्रम कारावास तथा एक अन्य मामले में कलामुद्दीन को 10 वर्ष की कठोर कारावास व 12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। इन मामलों में शासकीय अधिवक्ताओं द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि कुल 341 वारंट निर्गत किए गए, जिनमें से 244 तामील कराए गए। 212 गवाह न्यायालय में उपस्थित हुए, जिनमें 203 के बयान दर्ज किए गए, जबकि 9 गवाहों के बयान विभिन्न काread more:https://worldtrustednews.in/sahitya-chetna-samaj-holds-condolence-meeting-on-the-demise-of-swara-samragini-asha-bhosle-pays-heartfelt-tribute/
मुख्य राजस्व अधिकारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) एवं लोक अभियोजकों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में अभियुक्त बरी हुए हैं, उनकी पुनः विधिवत समीक्षा की जाए और आवश्यक होने पर अपील प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाए। उन्होंने विशेष रूप से गंभीर धाराओं में जमानत प्रार्थना पत्रों का प्रभावी विरोध करने तथा अधिक से अधिक साक्ष्यों को न्यायालय में प्रस्तुत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभियोजन का मुख्य उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए और इसके लिए हर स्तर पर ठोस एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की जाए। बैठक में अभियोजन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एवं शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) उपस्थित रहे।