अन्तर्राष्ट्रीय शायर खुर्शीद अफसर बिसवानी के 86वें जन्म दिवस पर विशेष

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सीतापुर।मशहूर एवं मारूफ शायर स्व.खुर्शीद अफसर बिसवानी अनोखी साहित्यिक प्रतिभा के धनी रहे हैं। वह हिंदी उर्दू साहित्य के लिए एक मिसाल थे। हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक सूफी संत शैखुल औलिया हज़रत गुलजार शाह और बाबा विश्वनाथ की पवित्र नगरी बिसवां ने 16 मार्च 1940 को सैय्यद खुर्शीद अफसर बिसवानी जैसे मशहूर अन्तर्राष्ट्रीय शायर को जन्म दिया।उन्होंने अपने बचपन में कानपुर में रहकर मशहूर शायर एवं महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  मौलाना हसन मोहानी के घर जाकर शिक्षा ग्रहण की उसके बाद अपने गृह नगर बिसवां आकर उस समय के मशहूर शायर जिगर बिसवानी के शागिर्द हो गये।कौमी यकजहती का शायर खुर्शीद अफसर बिसवानी तंग हालातों से लड़ने और मुश्किलों का सामना करने का संदेश अवाम को देता रहा। उनकी शायरी में भारतीय सभ्यता एवं इंसानियत की तस्वीर नजर आती है।read more:https://khabarentertainment.in/tension-between-afghanistan-and-pakistan-is-once-again-reaching-a-dangerous-point/  उन्होंने 21 वर्ष की कम उम्र से ही साहित्यिक लेखन का कार्य शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने नाम के साथ साथ बिसवां का भी नाम रोशन किया। दर्जनों काव्य संग्रहों, गीत व ग़ज़ल संग्रहों के अलावा दर्जनों साहित्यिक ग्रंथों की रचनाएं की तथा तमाम पत्र पत्रिकाओं के लिए नियमित रूप से लेखन का कार्य भी किया।पेशे से वह एक अच्छे वकील भी थे। उन्हें साहित्य लेखन के लिए दर्जनों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार भी मिले।उन्होंने समाज को आगाह करते हुए कहा था कि-  “ऐसा न हो चराग कहीं घर ही फूंक दे, यह देखकर जलाओ कि रुख क्या हवा का है।” उनकी शायरी बड़े तजर्बे व  होशो हवास शायरी की थी। ऐसा कोई विषय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो। खुर्शीद अफसर बिसवानी ने मोहब्बत के पैगाम को आम करते हुए कहा कि- “हमने दुश्मन को भी दुश्मन नहीं समझा अफसर, हम तो कातिल को भी जीने की दुआ देते हैं।” उनके जज़्बात का अंदाजा इस शेर से लगाया जा सकता है कि- ” बढ़ते हैं, भटकते हैं, गिरते हैं, समझते हैं। मंजिल के तमन्नाई हर हाल में चलते हैं।”मोहब्बत व भाई चारा का पैगाम देते हुए 17 जून 2001 को वह हम सभी को छोड़कर इस फानी दुनिया से रुखसत हो गये।फिर भी जब तक यह दुनिया रहेगी उनका नाम अदब की दुनिया में एहतराम से लिया जाता रहेगा। आज वह मेरे बीच नहीं है लेकिन उनका नाम हमेशा अमर रहेगा।

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