गाजीपुर। ग्राम पंचायत सचिवालयों में डिजिटल सेवाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे पंचायत सहायकों का आक्रोश शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर खुलकर सामने आया। लंबे समय से मानदेय भुगतान न होने, बेहद कम वेतन तथा कार्यस्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव से नाराज पंचायत सहायकों ने गाजीपुर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
प्रदर्शन कर रहे पंचायत सहायकों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने और पंचायत स्तर पर ऑनलाइन कार्यों को गति देने के उद्देश्य से उनकी नियुक्ति की थी। वर्तमान में उन्हें मात्र छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में बेहद कम है। पंचायत सहायकों ने मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की।read more:https://pahaltoday.com/sukesh-chandrashekhar-granted-bail-in-rs-200-crore-money-laundering-case/उन्होंने आरोप लगाया कि गाजीपुर जनपद की 1238 ग्राम पंचायतों में नियुक्त पंचायत सहायकों को पंचायत सचिवालयों में बैठकर प्रमाण पत्र, पंजीकरण, ऑनलाइन आवेदन, सरकारी योजनाओं का डेटा फीडिंग तथा अन्य डिजिटल सेवाओं से जुड़े कार्य करने होते हैं, लेकिन अधिकांश सचिवालयों में कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की समुचित व्यवस्था नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत सचिवालयों के लिए खरीदे गए कंप्यूटर, सीपीयू और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कई जगह सचिवालयों में न रखकर ग्राम प्रधानों के घरों में रखे गए हैं, जिससे पंचायत सहायकों को कार्य करने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। महिला पंचायत सहायकों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि कई सचिवालयों में शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा हाल ही में उन्हें कृषि सर्वेक्षण कार्यों में भी लगाया गया, जिसके चलते उन्हें गांवों से बाहर जाना पड़ा और असुरक्षा की स्थिति का सामना करना पड़ा, जबकि उनकी नियुक्ति कार्यालयीन कार्यों के लिए की गई थी। पंचायत सहायकों ने बताया कि कई कर्मचारियों का 12 महीने तो कई का 18 महीने तक का मानदेय लंबित है। लगातार भुगतान न होने से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। आक्रोशित पंचायत सहायकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान, मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने, पंचायत सचिवालयों में कंप्यूटर और इंटरनेट सहित आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कार्यस्थलों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।