गाजीपुर में उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान, निपुण विद्यालय बनाने वाले प्रधानाध्यापकों को मिला गौरव

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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के नव वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 18 मार्च 2026 को ऑडिटोरियम हॉल, गाजीपुर में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि एवं शिक्षा विभाग से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया।बेसिक शिक्षा विभाग, सदर क्षेत्र के उन प्रधानाध्यापकों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने विद्यालयों को निपुण विद्यालय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन शिक्षकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी लगन, मेहनत और नवाचारों के जरिए विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाया।read more:https://khabarentertainment.in/foundation-day-of-bharatiya-kisan-sangh-celebrated/
स्मार्ट शिक्षण विधियों, बच्चों की सहभागिता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सरिता अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह एवं मुख्य विकास अधिकारी शामिल रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से प्रधानाध्यापकों को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान देकर उनके कार्यों की सराहना की। अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि शिक्षकों का समर्पण ही शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।सम्मानित होने वाले प्रधानाध्यापकों में शिप्रा श्रीवास्तव (प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर जल्दी), रिंकू सिंह (प्राथमिक विद्यालय कैथवलिया (इ)), मीनू पटेल (प्राथमिक विद्यालय परसही) एवं बीणा मिश्रा (प्राथमिक विद्यालय बेइमानपुर,व अन्य प्रधानाध्यापक भी शामिल रहे। इन सभी ने अपने विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया।कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता सुधार और छात्रों की बेहतर भागीदारी जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। अंत में सभी उपस्थित जनों ने शिक्षा को और सशक्त बनाने तथा प्रत्येक विद्यालय को निपुण विद्यालय बनाने का संकल्प लिया।यह आयोजन न केवल शिक्षकों के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत सिद्ध हुआ, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और मजबूत हुई।

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