जनपद में महिला स्वयं सहायता समूह एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण

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मिर्जापुर। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार एवं अपर जिलाधिकारी (वि०/राव) अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आज दिनांक 28 मार्च 2026 को जनपद के 100 विभागीय स्टेकहोल्डर का “आपदा जोखिम न्यूनीकरण” विषय पर तथा जनपद के सिटी तथा कोन ब्लॉक से संबंधित 50-50 महिलाएं, कुल 100 महिला स्वयं सहायता समूह की प्रमुख महिलाओं का एक दिवसीय कार्यशाला/प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विकास भवन सभागार, मीरजापुर में किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी तथा महिला स्वयं सहायता समूह की प्रमुख महिलाएं उपस्थित रहीं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना निदेशक- डी0आर०डी०ए० अजय कुमार सिंह, द्वारा अवगत कराया गया की आपदा प्रबंधन का मूल आधार क्षमता निर्माण पूर्व तैयारी तथा समन्वित प्रतिक्रिया  है। किसी भी आपदा से होने वाली जन-धन की क्षति को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय पूर्व तैयारी एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन है। यदि संबंधित विभागों, स्थानीय प्रशासन एवं समुदाय स्तर पर आवश्यक प्रशिक्षण, संसाधन एवं जागरूकता उपलब्ध हो तो आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सामान्यतः हम उन आपदाओं पर अधिक ध्यान देते हैं जो बार-बार घटित होती हैं, जबकि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से उन संभावित आपदाओं के लिए भी तैयारी आवश्यक है जो कम घटित होती हैं, परंतु घटित होने पर अत्यधिक विनाशकारी हो सकती हैं। इसलिए बहु-आपदा दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। जनपद मीरजापुर में बाढ़ एक प्रमुख आपदा है, जिसमें की प्रशासन तथा पुलिस की मुस्तैदी से क्षति न्यून रहती है और इसके विपरीत, डूबने से होने वाली मृत्यु की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि डूबना जनपद की एक गंभीर एवं उपेक्षित आपदा है, जो अधिकांशतः लापरवाही, सुरक्षा उपायों की अनदेखी तथा जागरूकता के अभाव के कारण घटित होती है। घाटों, नदियों, तालाबों एवं जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने तथा स्थानीय स्तर पर बचाव उपायों को मजबूत करने पर बल दिया जाना उचित रहता है। जब तक आम जनता को आपदा जोखिम, बचाव के उपायों तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया के बारे में जागरूक नहीं किया जाएगा, तब तक पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों एवं स्थानीय समुदायों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। आपदा के समय सभी विभागोंकृप्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, नगर निकाय, विद्युत, परिवहन आदिकृका त्वरित एवं समन्वित सहयोग अत्यंत आवश्यक होता है। समय पर सूचना का आदान-प्रदान, संसाधनों की उपलब्धता तथा स्पष्ट दायित्व निर्धारण से राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी बनता है।इसी क्रम में छक्त्थ् से आए वक्ता टीम कमांडर राहुल वर्मा द्वारा विभिन्न प्रकार की आपदाओं के साथ-साथ डूबने एवं सर्पदंश से बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक या तांत्रिक उपचार पर विश्वास न करें, बल्कि तत्काल निकटतम चिकित्सालय में उपचार कराना ही जीवन रक्षक उपाय है। इसके अतिरिक्त उन्होंने आपदा के समय विभिन्न विभागों की भूमिका, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी तथा व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों पर भी प्रकाश डाला।यूनिसेफ के आपदा प्रबंधन सलाहकार घनश्याम मिश्र ने आपदा प्रबंधन में बच्चे और महिलाए जो कि सबसे नाजुक वर्ग के अंतर्गत आती है, उनके ऊपर विशेष ध्यान देने कि आवश्यकता है, पर चर्चा किया। जनपद मीरजापुर के नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के आकड़ों के आधार पर बताया कि जनपद में कुपोषित बच्चे जिसे स्टेंटेड और वेस्टेड कहते हैं उनकी संख्या राज्य के अनुपात में बहुत ज्यादा है, इसी प्रकार महिलाएं भी अतिकुपोषित है जिनमें खून की कमी है, ऐसे में किसी आपदा के समय में जब भोजन, आवासन व स्वच्छता आदि में समस्या होती है तो ऐसी स्थिति में इनकी स्थिति और भी खराब हो सकती है और यह स्थिति लंबे समय तक बने रहने से जानलेवा स्थिति भी बन जाती है। इसी तरह के अनेक उदाहरण लेकर आपदा प्रबंधन के बुनियादी तत्वों के बारे में चर्चा की।अग्निकांड विभाग से आए अग्निशमन अधिकारी अनिल प्रताप सरोज ने ग्रीष्म ऋतु का उल्लेख करते लू के रोकथाम के उपायों के सम्बन्ध में चर्चा करने के उपरांत तथा फायर एक्टिंग्विशर एवं अग्निकांड के रोकथाम के उपायों के सम्बन्ध में आए हुए विभागीय हितधारकों को प्रशिक्षित किए ।कार्यक्रम का आयोजन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मीरजापुर द्वारा किया गया।

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