सहजीपुर में कथा के प्रथम दिवस राजा परीक्षित और शुकदेव प्रसंग का हुआ वर्णन। 

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 जिला ब्यूरो – रवि प्रकाश द्विवेदी -संग्रामपुर/अमेठी। संग्रामपुर क्षेत्र के ग्रामसभा सहजीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास पूज्य स्वामी ओमानंद जी महाराज ने मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ किया। धार्मिक आयोजन की मुख्य यजमान श्रीमती गीता तिवारी एवं बालकृष्ण तिवारी हैं, जिनके आवास पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।कथा के प्रथम दिवस स्वामी ओमानंद जी महाराज ने भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के जीवन के तीन महत्वपूर्ण आधार हैं, जिनके माध्यम से व्यक्ति भगवान के निकट पहुंच सकता है और अपने जीवन को सफल बना सकता है।read more:https://khabarentertainment.in/101-mobile-phones-recovered-under-operation-muskaan-in-unnao-phones-worth-over-rs-22-lakh-returned-to-owners/
कथा के दौरान महाराज जी ने नैमिषारण्य धाम का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वहां एकत्रित ऋषि-मुनियों ने सूत जी महाराज से श्रीमद्भागवत कथा सुनाने का आग्रह किया था, ताकि कलियुग में भटके हुए प्राणियों को धर्म और भक्ति का मार्ग मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने राजा परीक्षित की कथा का प्रारंभिक वर्णन करते हुए शुकदेव जी महाराज के आगमन का प्रसंग भी सुनाया।स्वामी ओमानंद जी महाराज ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सच्चे महात्मा और सन्यासी मनुष्य के भावों और पीड़ा को समझने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार एक ब्राह्मण अत्यंत दुखी होकर रो रहा था। उसकी आंखों से आंसू गिर रहे थे। तभी वहां एक दंडी स्वामी पहुंचे और उन्होंने उसके आंसुओं को देखकर ही समझ लिया कि वह किसी गहरे दुख में है।महाराज जी ने कहा कि मनुष्य सामान्यतः दो ही स्थितियों में रोता है—एक अत्यंत दुख में और दूसरा अत्यधिक प्रेम या भक्ति में। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति और कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन के दुख दूर होते हैं और उसे मानसिक शांति तथा संतोष की प्राप्ति होती है

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