मानवता अभ्युदय महायज्ञ के पांचवें दिन गूंजा भक्ति और ज्ञान का संगम

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गाजीपुर।श्री गंगा आश्रम, बयेपुर देवकली में आयोजित 48वां मानवता अभ्युदय महायज्ञ अपने पांचवें दिन भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा के विशेष वातावरण के साथ सम्पन्न हुआ। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी महायज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिल रही है।महायज्ञ का संचालन श्री गंगा आश्रम के सर्वराहकार एवं मानव धर्म प्रसार समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष, बाबा गंगारामदास उत्तर माध्यमिक बालिका विद्यालय के प्रबंधक महंत भोला बाबा के सान्निध्य में किया जा रहा है। पांचवें दिन प्रातःकाल से संध्या तक श्रीरामचरितमानस का नवाह्न पारायण तथा वैदिक विधि से हवन-यज्ञ का आयोजन हुआ, जिससे पूरे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।सायंकालीन सत्संग सभा में आयोजित ज्ञानयज्ञ में श्री वीरेंद्र बाबा एवं सुनील जी द्वारा गुरु अर्चना प्रस्तुत की गई। वहीं श्री सुब्बा जी, श्री खरपतू और श्री सत्यम बाबा ने भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।इस अवसर पर महंत भोला बाबा ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु के मार्ग पर अडिग विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण ही जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा अहंकार को स्वीकार नहीं करता, इसलिए मनुष्य को विनम्रता अपनानी चाहिए।श्री मोहन जी ने परमहंस बाबा गंगारामदास जी से जुड़ा एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए इंद्रियों पर नियंत्रण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बिना संयम के व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता।श्री राजेश मास्टर साहब ने कहा कि वही व्यक्ति सच्चा मनुष्य कहलाने का अधिकारी है, जो दूसरों के जीवन में सुख का कारण बनता है। उन्होंने बताया कि महाराज जी द्वारा समाज के उपेक्षित और असहाय लोगों की सेवा सदैव प्राथमिकता रही।युवा व्यास माधव कृष्ण ने अपने प्रवचन में संवाद की मर्यादा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बोलना भी एक तपस्या है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति को बोलने से पहले यह विचार करना चाहिए कि उसका वचन सत्य, प्रिय, हितकारी और अनुद्वेगकारी है या नहीं। उन्होंने भगवान बुद्ध और भगवान श्रीकृष्ण के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि संसार दुखमय है और इच्छाओं के बंधन से ही मनुष्य क्रोध और मोह में फंस जाता है।रामायण प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शूर्पणखा की कामना और रावण का क्रोध ही महायुद्ध का कारण बना। उन्होंने समझाया कि जब मनुष्य मोह और क्रोध में पड़ जाता है, तो वह सत्य को भी स्वीकार नहीं कर पाता।कार्यक्रम के दौरान दोपहर 1 बजे एवं रात्रि 10 बजे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर परमहंस बाबा गंगारामदास एवं यज्ञ पुरुष भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। दिन का समापन गुरु भगवान की आरती एवं आश्रम की परिक्रमा के साथ हुआ।पूरे आयोजन में अनुशासन, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिससे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण और अधिक सशक्त हुआ।

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