एम्स भोपाल की रिपोर्ट पर एनजीटी सख्त, सुधार के दावों को माना, जुलाई में अगली सुनवाई

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फोटो 01

म्योरपुर, सोनभद्र। सिंगरौली परिक्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण तथा उससे जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर प्रस्तुत एम्स भोपाल की रिपोर्ट पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले में जिला प्रशासन द्वारा सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है।सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी की ओर से दायर जनहित याचिका पर एक अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सृष्टि अग्निहोत्री और संजना ने क्षेत्र की गंभीर स्थिति से अधिकरण को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एम्स भोपाल की अध्ययन रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि औद्योगिक इकाइयों की मनमानी और नियमों की अनदेखी के कारण बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि प्रदूषण से प्रभावित और बीमार लोगों को उपचार के लिए मुआवजा दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक की सभी जांच रिपोर्टों में स्थिति को गंभीर बताया गया है, ऐसे में उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने होंगे और सरकार को पीड़ितों के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि इस पर आगे भी सुनवाई आवश्यक है। वहीं, सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद और पर्यावरण कार्यकर्ता जगतनारायण विश्वकर्मा ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल पत्राचार से सुधार संभव नहीं है। उन्होंने जिला स्तर पर एक समिति बनाकर स्थलीय जांच कराने और वाहिनी को भी शामिल करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि बलियानाला और रेणुका नदी में अब भी गंदगी और राखड़ बहाई जा रही है तथा वायु प्रदूषण में भी कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आर.के. सिंह ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा संबंधित उद्योगों को निर्देश जारी किए गए हैं। यदि सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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