जमाने की लानत और जमानत  

जमाने की लानत और जमानत  

जमाने की लानत और जमानत  

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्तचरवाणी 

“बच्चा! सुना है फलाने का लड़का चरस-गांजे का अमृतपान करते हुए पकड़ा गया। लगता है या तो उसे बाहर की हवा रास नहीं आई या फिर घर पर लात नही पड़ी, जो अपनी खातिरदारी करवाने हवालात चला गया।” गुरु ठनठनलाल सुट्टे का कश खींचते हुए चेले  ढुलमुलदास से पूछा।

“सही सुना है गुरु जी आपने! इन पहाड़ों और कंदराओं में रहते हुए भी आपका बाहरी ज्ञान एकदम अपडेटेड है। आपको देखने के बाद कबीर जी का ‘माला तो कर में फिरै’ वाला दोहा एकदम सही लगता है।” चेले ने गुरु जी की चुटकी लेते हुए कहा।

साहित्य जगत में धांधली

“लेकिन बच्चा! आर्य देश में आर्य जैसे नाम वाले बालक ने ऐसा कौन सा विचित्र काम कर दिया, जो उसे उठा ले गए?“

“गुरुजी! लगता है आप सठिया गए हैं। आर्य देश में चरस-गांजा का सेवन करना अनार्य कार्य नहीं तो आरती उतारने वाला कार्य  है क्या? हमें अच्छे-बुरे का ज्ञान कराने वाले आप ही ऐसी बात करेंगे तो हम जैसों का क्या होगा?”

“बच्चा! हमारे ज्ञान पर शक मत करो। हम जो भी कहते हैं बड़े अनुभव के साथ कहते हैं। यह बाल यूं ही धूप में सफेद नहीं किए हैं। सभी जानते हैं कि बड़े-बड़े बाप की अय्याशी करने वाली संतानें यही हरकतें करती हैं। यहाँ हमाम में सभी नंगे हैं।“

“गुरु जी! आपकी बात तो सही है। लेकिन ‘पर्दे के पीछे वाला बंदा’ उसी हमाम में जाना चाहेगा जहाँ उसके काम का नंगा मिलेगा। सौ बात की एक बात जो पकड़ा गया वह चोर, जो न मिले वह सिरमौर।“

“बच्चा! कहीं तुम भी उसी हमाम में तो नहीं नहा रहे हो?”

“छीः-छीः गुरुजी! यह कैसी बातें कर रहें हैं आप? किसी पर संदेह करना उसका अपमान होता है। इसलिए मेरे बारे में कतई ऐसा मत सोचिए।“

“बच्चा! छोटी-छोटी बातों पर इतना नाराज़ नहीं होते। अपने हो इसीलिए कह देते हैं। पराए होते तो अब तक हम कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रहे होते। अच्छा यह सब छोड़ो। तुम्हारे हिसाब से बताओ कि उस फलाने लड़के का आगे क्या होगा?”

“गुरु जी! यह भी कोई पूछने वाली बात है। एकदम सुलझा हुआ मामला है। उसे जमानत मिलने से रही। वह तो गया लंबे दिनों के लिए।“

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“बच्चा! इसीलिए तुम कच्चे हो। लंबे दिनों के लिए वे जाते हैं, जो छोटे होते हैं। जमाने की लानत से बचने के लिए जमानत बहुत जरूरी है। यह कोर्ट कचहरी में कम, सेटिंग से ज्यादा मिलती है। इसके लिए म्युचुअल फंड से भी महीन स्टार वाली शर्तें समझनी पड़ती हैं। राजनीति में राज से ज्यादा राज़ और नीति से नियति मायने रखते हैं। अब मेरी बात ध्यान से सुनो। फलाना लड़के के बाप के पास अकूत संपदा है। अकूत संपदा में से कुछ इधर-उधर भेंट चढ़ाने की जरूरत है। दिमाग वाला होगा तो ‘बुल्डोजर चालीसा’ याद कर लेगा। जिसे जो चाहिए उसे वह पहुँचा देगा। अंदर ही अंदर मामला सुलट जाएगा और लड़का बाहर। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो बाप जल्द चुनाव जीतकर अपने लड़के लिए लाइफलांग अनलिमिडेट डाटा वाला चरस-गांजा पैकेज थमा देगा। यकीन न हो तो मेरी बात लिख लो। “