गाजीपुर जमानियां। नगर कस्बा बाजार में बंदरों का आतंक अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। बंदरों के झुंड खुलेआम सड़क पर उतरकर धमाचौकड़ी मचा रहे हैं, वहीं घरों में घुसकर कपड़े, खाने-पीने का सामान और अन्य वस्तुएं उठा ले जा रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, बंदरों का व्यवहार दिन-ब-दिन आक्रामक होता जा रहा है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई लोग बंदरों के हमले और भगदड़ के दौरान गिरकर घायल हो चुके हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। लोग अब घरों में कैद रहने और डर के साये में जीने को मजबूर हैं।व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, अमन शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार अहमद खान वारसी सहित हेमंत यादव, आरिफ खान वारसी, उमेश कुशवाहा, निसात खान वारसी उर्फ प्रिंस, रितेश वर्मा, हयात खान वारसी, नेहाल खान, माहिर कमाल अंसारी, खालिद अंसारी, असलम पान वाले आदि लोगों ने बताया कि पहले बंदर पेड़ों पर ही रहते थे, लेकिन अब वे झुंड बनाकर बाजार और सड़कों पर उतर आए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि वनों और पेड़ों की कटाई के कारण बंदरों का प्राकृतिक आवास और भोजन खत्म हो गया है। इसके अलावा, लोगों द्वारा बंदरों को खाना खिलाने की आदत ने उन्हें इंसानों पर निर्भर बना दिया है, जिससे वे और अधिक आक्रामक हो गए हैं।स्थिति यह हो गई है कि बाजार से सामान लेकर लौट रहे राहगीरों के हाथों से बंदर जबरन खाने-पीने की चीजें छीन रहे हैं और विरोध करने पर हमला भी कर रहे हैं। इससे दुकानदारों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द बंदरों को पकड़कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ा जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।